मुगलसराय मंदिर ध्वस्तीकरण में बड़ा हादसा: ढांचा गिरने से कर्मचारी की मौत, सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
चंदौली के मुगलसराय में काली माता मंदिर ध्वस्तीकरण के दौरान ढांचा गिरने से एक कर्मचारी की मौत और दूसरा घायल हुआ। हादसे के बाद सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल उठे।

इस कोलाज तस्वीर में तीन हिस्से दिख रहे हैं; बाएं हिस्से में रात के समय बैरिकेडिंग के पीछे पुलिस बल और लोगों की भीड़ खड़ी है, बीच वाले हिस्से में मलबे के पास खड़ा एक पीला बुलडोजर (उत्खनक) और मंदिर का टूटा हुआ रंगीन ढांचा नजर आ रहा है, तथा दाएं हिस्से में सफेद पृष्ठभूमि पर मृतक बलदेव यादव का क्लोज-अप चेहरा दिखाई दे रहा है।
चंदौली के पड़ाव–मुगलसराय सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत प्राचीन काली माता मंदिर के पुराने ढांचे को ध्वस्त करने के दौरान शुक्रवार देर रात बड़ा हादसा हो गया। मंदिर का ढांचा अचानक भरभराकर गिर पड़ा, जिसकी चपेट में आकर दो कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान बलदेव यादव की मौत हो गई, जबकि दूसरे घायल का इलाज जारी है।
यह हादसा केवल एक कर्मचारी की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़क चौड़ीकरण परियोजना में सुरक्षा मानकों के पालन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। उल्लेखनीय है कि इसी परियोजना के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर यह दूसरी गंभीर घटना बताई जा रही है।
पड़ाव से मुगलसराय तक सड़क चौड़ीकरण कार्य के तहत सड़क की जद में आने वाले मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों को विधि-विधान के साथ दूसरे स्थानों पर स्थापित किया जा रहा है। इसी प्रक्रिया के तहत काली माता मंदिर की मूर्तियों को सुरक्षित स्थानांतरित करने के बाद पुराने ढांचे का ध्वस्तीकरण किया जा रहा था। इसी दौरान मंदिर का ढांचा अचानक ढह गया और वहां कार्य कर रहे दो कर्मचारी उसकी चपेट में आ गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ध्वस्तीकरण के दौरान पर्याप्त बैरिकेडिंग, सुरक्षा घेरा और श्रमिकों के लिए आवश्यक सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी। यदि जांच में इसकी पुष्टि होती है, तो यह संबंधित विभाग और कार्यदायी संस्था की गंभीर लापरवाही मानी जाएगी।
ध्वस्तीकरण जैसे जोखिमपूर्ण कार्यों में सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य माना जाता है। ऐसे में यह हादसा इस बात पर भी सवाल उठाता है कि क्या निर्धारित एसओपी का पालन किया गया था और यदि नहीं किया गया, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।
अब आवश्यकता केवल हादसे की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी तय करने की भी है। यदि किसी अधिकारी, ठेकेदार या कार्यदायी संस्था की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा और घायल कर्मचारी को बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
यह हादसा एक बार फिर संकेत देता है कि विकास कार्यों के साथ सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन भी उतना ही आवश्यक है। यदि निर्माण और ध्वस्तीकरण कार्यों में सुरक्षा संबंधी नियमों की अनदेखी जारी रही, तो ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकना मुश्किल होगा।

Pratahkal Bureau
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