MRF प्लांट में रीसाइक्लिंग का दावा, फिर भी हाईवे किनारे कचरा, नगर पालिका पर सवाल
MRF प्लांट बनने के बाद भी हाईवे किनारे खुले में कूड़ा फेंके जाने से solid waste management नियमों के उल्लंघन और सरकारी संसाधनों की लापरवाही की जांच की मांग।

चंदौली के पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर में MRF प्लांट के संचालन के बावजूद हाईवे किनारे खुले में कचरा फेंके जाने से नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
चंदौली में पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर पालिका परिषद की कचरा प्रबंधन व्यवस्था सवालों के घेरे में है। कूड़ा निस्तारण के लिए लाखों रुपये खर्च कर MRF प्लांट तैयार किया गया है। कचरे की छंटाई और रीसाइक्लिंग की व्यवस्था के साथ सफाई के लिए गाड़ियां भी तैनात हैं। इसके बावजूद हाईवे किनारे खुले में कचरा फेंके जाने का मामला सामने आने से नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। शहर को स्वच्छ रखने और पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने की जिम्मेदारी निभाने वाली व्यवस्था में कथित लापरवाही से सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
नगर के कचरे की छंटाई, उपयोगी सामग्री को अलग करने और पुनर्चक्रण योग्य अपशिष्ट के उचित प्रबंधन के लिए MRF प्लांट बनाया गया है। ऐसे में यदि कूड़ा उठाने वाले वाहन कचरे को निर्धारित स्थान तक पहुंचाने के बजाय हाईवे किनारे खाली कर रहे हैं, तो प्लांट के संचालन और निगरानी व्यवस्था की जांच जरूरी हो जाती है। सवाल है कि प्लांट तक कचरा पहुंचाने की नियमित निगरानी होती है या नहीं, प्रतिदिन एकत्रित कचरे और प्लांट में पहुंचने वाले कचरे का हिसाब रखा जाता है या नहीं और अधिकारियों को वाहनों की आवाजाही तथा कचरा उतारने के स्थान की जानकारी रहती है या नहीं।
जब कचरे के उचित प्रबंधन के लिए प्लांट मौजूद है, तब हाईवे किनारे खुले में कूड़ा फेंके जाने की स्थिति व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठाती है। यदि कचरे का निस्तारण निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नहीं हो रहा है, तो लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई व्यवस्था के उद्देश्य और उपयोगिता की समीक्षा करना भी आवश्यक है।
हाईवे किनारे खुले में कचरा फेंकने से दुर्गंध फैलने, गंदगी बढ़ने, आवारा पशुओं के जमावड़े और प्लास्टिक के आसपास फैलने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। कचरे में सड़ने वाले पदार्थ और अन्य अपशिष्ट मौजूद होने पर मिट्टी तथा जल स्रोतों के प्रदूषित होने का खतरा भी रहता है। वहीं, यदि कचरे में मौजूद प्लास्टिक या अन्य सामग्री जलाई जाती है, तो वायु प्रदूषण का जोखिम बढ़ सकता है। इस तरह मामला केवल सफाई व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा से भी जुड़ा है।
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत कचरे का उचित संग्रहण, पृथक्करण, प्रसंस्करण और पर्यावरण के अनुकूल निस्तारण सुनिश्चित करना स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी है। MRF प्लांट का उद्देश्य भी सूखे कचरे से पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को अलग करना और उसके उचित प्रबंधन में सहायता करना है। ऐसे में यदि नगर पालिका की गाड़ियों द्वारा खुले में कचरा फेंके जाने की पुष्टि होती है, तो यह जांचना जरूरी होगा कि संबंधित नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
मामले में सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जब कूड़ा निस्तारण के लिए प्लांट बनाया गया है और वाहनों के संचालन तथा सफाई व्यवस्था पर भी खर्च किया जाता है, तो यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कचरे का निस्तारण निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हो रहा है या नहीं। यदि कचरा प्लांट तक पहुंचाने के बजाय दूसरी जगह फेंका जा रहा है, तो वाहन संचालन, कचरा परिवहन और निस्तारण के नाम पर किए जा रहे खर्च की जांच का सवाल भी उठता है।
यह भी जांच का विषय है कि कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों की लॉगबुक, GPS लोकेशन, ईंधन खर्च, प्लांट में आने वाले कचरे की मात्रा और निस्तारण के रिकॉर्ड का आपस में मिलान कराया गया है या नहीं। इन अभिलेखों की जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि मामला निगरानी में लापरवाही का है, ठेकेदार की मनमानी का या सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका से जुड़ा है। हालांकि, जांच के बिना भ्रष्टाचार का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा, लेकिन कचरा प्रबंधन की व्यवस्था और सरकारी खर्च को लेकर उठे सवालों की पड़ताल जरूरी है। MRF प्लांट के उद्देश्य, वाहनों की वास्तविक गतिविधियों और कचरे के निस्तारण के रिकॉर्ड की जांच से ही व्यवस्था की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

Manmohan, Chandauli (Uttar pradesh)
नाम: मनमोहन
पद: रिपोर्टर (प्रातः काल)
कार्यक्षेत्र: चंदौली (उत्तर प्रदेश)
बीट (मुख्य विषय): क्राइम (अपराध) और प्रशासन
मूलमंत्र: निष्पक्ष, बेबाक और तथ्यपरक पत्रकारिता
परिचय (About Manmohan)
मनमोहन उत्तर प्रदेश के चंदौली क्षेत्र के एक सजग, निडर और समर्पित पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल' समाचार पत्र में रिपोर्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मनमोहन मुख्य रूप से क्राइम (अपराध) और स्थानीय प्रशासन से जुड़े मामलों को कवर करते हैं। उनका पत्रकारिता दृष्टिकोण पूरी तरह से "निष्पक्ष, बेबाक और तथ्यपरक" खबरों पर आधारित है, जिससे वे क्षेत्र की जनता के मुद्दों और प्रशासनिक सच्चाई को बिना किसी दबाव के सामने लाते हैं।
पत्रकारिता कौशल एवं अनुभव (Skills & Experience)
मनमोहन को चंदौली जिले के जमीनी मुद्दों, भौगोलिक परिस्थितियों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली की गहरी समझ है। अपराध से जुड़ी घटनाओं की सटीक रिपोर्टिंग और प्रशासनिक कमियों व सुधारों को प्रमुखता से उठाना उनकी मुख्य विशेषता है। तथ्यों की गहराई में जाकर खबर की प्रामाणिकता जांचना उनके काम की शैली का हिस्सा है।
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एम.जे. (M.J. - Master of Journalism): मनमोहन पत्रकारिता में परास्नातक (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म) की डिग्री से योग्य हैं। उनकी यह उच्च प्रोफेशनल डिग्री और पत्रकारिता की सैद्धांतिक समझ उन्हें जटिल खबरों का तार्किक विश्लेषण करने और समाज के सामने एक जिम्मेदार मीडिया रिपोर्ट प्रस्तुत करने में सक्षम बनाती है।
