चंदौली के मवई खुर्द में 30 बीघा सरकारी बंजर-पोखरे की जमीन पर कब्जे का आरोप, राजस्व तंत्र पर उठे सवाल
चंदौली के मवई खुर्द में 30 बीघा सरकारी बंजर-पोखरे की जमीन पर कब्जे के आरोपों ने राजस्व तंत्र पर सवाल खड़े किए हैं। शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से मामला चर्चा में है।

तस्वीर में सफेद शर्ट पहने एक व्यक्ति हाथ में कुछ कागजात लेकर उन्हें पढ़ते हुए दिखाई दे रहा है।
चंदौली के डीडीयू नगर तहसील क्षेत्र के मवई खुर्द गांव में सरकारी बंजर और पोखरे की भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से सरकारी भूमि पर कब्जा कर प्लॉटिंग और निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन लगातार शिकायतों के बावजूद राजस्व प्रशासन की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। अब इस मामले में सिविल कोर्ट चंदौली के अधिवक्ता ने भी प्रशासनिक अधिकारियों और राजस्व कर्मियों की कथित मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए हैं।
गांव निवासी संतोष कुमार ने तहसीलदार को दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि मवई खुर्द की कई आराजी संख्या की भूमि सरकारी अभिलेखों में बंजर और सार्वजनिक श्रेणी में दर्ज है। इसके बावजूद उन जमीनों पर झुग्गियां, पक्के निर्माण और अवैध प्लॉटिंग की जा रही है। उनका आरोप है कि गलत अथवा फर्जी आराजी संख्या का सहारा लेकर बाहरी लोगों को जमीन बेची जा रही है, जिससे सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंच रहा है।
मामले को और गंभीर बताते हुए सिविल कोर्ट चंदौली के अधिवक्ता अवधेश कुमार यादव ने वीडियो बयान जारी कर दावा किया कि करीब 30 बीघा सरकारी बंजर और पोखरे की भूमि पर कब्जा किया जा चुका है। उनका आरोप है कि समाधान दिवस समेत अन्य माध्यमों से कई बार शिकायत करने के बावजूद राजस्व विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उन्होंने क्षेत्रीय लेखपाल, कानूनगो और अन्य अधिकारियों पर कथित संरक्षण देने का भी आरोप लगाया।
अधिवक्ता अवधेश कुमार यादव ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत करने के बाद उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं और उनका पीछा कर उन पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने प्रशासन से सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग भी की है।
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि संबंधित भूमि वास्तव में सरकारी बंजर या पोखरे की श्रेणी में दर्ज है तो लगातार शिकायतों के बावजूद उसका सीमांकन और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अब तक क्यों नहीं की गई। यदि लगाए गए आरोप सही हैं तो मामला केवल अवैध कब्जे तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि राजस्व प्रशासन की जवाबदेही और संभावित मिलीभगत की निष्पक्ष जांच का विषय भी बनता है।
संतोष कुमार ने अपने प्रार्थना पत्र में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत अतिक्रमण हटाने, दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा पुलिस बल की सहायता से सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने की मांग की है। वहीं अधिवक्ता अवधेश कुमार यादव ने भूमि का सीमांकन कराने, अवैध कब्जाधारकों से अर्थदंड की वसूली करने और यदि भूमि पोखरा है तो उसका पुनर्जीवन कराने की मांग उठाई है।
हालांकि, समाचार लिखे जाने तक प्रशासन की ओर से इन आरोपों की पुष्टि या खंडन करते हुए कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था।

Pratahkal Bureau
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