चंदौली में साइबर ठगी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान अलीनगर पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के लिए बैंक खातों का इस्तेमाल कराने वाले गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क के तार 16 राज्यों तक जुड़े हैं। चिन्हित 17 म्यूल खातों के खिलाफ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर 76 साइबर फ्रॉड शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें करीब 29 लाख रुपये की ठगी की रिपोर्ट हुई है।

पुलिस ने 10 अगस्त की रात मुगलसराय के वीआईपी गेट के पास दबिश देकर नीतीश कुमार (30), निवासी नवादा, बिहार और अमन शर्मा (27), निवासी सकलडीहा, चंदौली को गिरफ्तार किया। दोनों के कब्जे से तीन स्मार्टफोन, आठ बैंक खाता विवरण, पांच पासबुक, एक चेकबुक, छह डेबिट कार्ड, छह सिम कार्ड, दो कूटरचित आधार कार्ड और 650 रुपये नकद बरामद किए गए।

पुलिस के मुताबिक, बरामद बैंकिंग दस्तावेजों और NCRP पोर्टल के मिलान में 7.20 लाख रुपये से अधिक की साइबर ठगी से जुड़े लेन-देन सामने आए हैं। जांच में सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उनकी पासबुक, चेकबुक, डेबिट कार्ड और सिम दूसरे लोगों तक पहुंचाते थे। इन बैंक खातों का इस्तेमाल लोन फ्रॉड, यूपीआई फ्रॉड, डिलीवरी और पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर ठगी की रकम मंगाने के लिए किया जाता था।

पुलिस के अनुसार, आरोपियों के पास से बरामद कूटरचित आधार कार्डों में फोटो आरोपियों की थी, जबकि नाम और पता किसी दूसरे व्यक्ति का दर्ज था। इनका इस्तेमाल पहचान छिपाने और पुलिस से बचने के लिए किया जाता था।

पूछताछ में यह भी सामने आया कि बैंकिंग सामग्री बिहार निवासी एक अन्य आरोपी सोनू सिंह तक पहुंचाई जाती थी। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है।

पुलिस के अनुसार, गिरोह बजाज फाइनेंस के नाम पर लोन, Meesho डिलीवरी पार्सल, फेसबुक विज्ञापन, पार्ट-टाइम जॉब और निवेश का झांसा देकर लोगों को निशाना बना रहा था। जांच में सामने आए म्यूल खातों और उनसे जुड़े लेन-देन ने साइबर ठगी के इस नेटवर्क की व्यापकता को उजागर किया है।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी अनजान व्यक्ति को OTP, UPI PIN, ATM/डेबिट कार्ड की जानकारी या बैंक खाते का एक्सेस न दें। किसी के कहने पर अपना बैंक खाता, पासबुक, चेकबुक, डेबिट कार्ड या सिम दूसरे व्यक्ति को देना भी भारी पड़ सकता है, क्योंकि ऐसे खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम के लिए किया जा सकता है और खाताधारक भी जांच के घेरे में आ सकता है।

साइबर ठगी होने पर घबराने के बजाय तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है, ताकि ठगी की रकम को समय रहते रोकने का प्रयास किया जा सके। अलीनगर पुलिस और साइबर सेल की कार्रवाई के बाद अब पुलिस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका और बैंकिंग लेन-देन की कड़ियों की जांच में जुटी है।

Manmohan, Chandauli (Uttar pradesh)

Manmohan, Chandauli (Uttar pradesh)

नाम: मनमोहन

पद: रिपोर्टर (प्रातः काल)

कार्यक्षेत्र: चंदौली (उत्तर प्रदेश)

बीट (मुख्य विषय): क्राइम (अपराध) और प्रशासन

मूलमंत्र: निष्पक्ष, बेबाक और तथ्यपरक पत्रकारिता

परिचय (About Manmohan)

मनमोहन उत्तर प्रदेश के चंदौली क्षेत्र के एक सजग, निडर और समर्पित पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल' समाचार पत्र में रिपोर्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मनमोहन मुख्य रूप से क्राइम (अपराध) और स्थानीय प्रशासन से जुड़े मामलों को कवर करते हैं। उनका पत्रकारिता दृष्टिकोण पूरी तरह से "निष्पक्ष, बेबाक और तथ्यपरक" खबरों पर आधारित है, जिससे वे क्षेत्र की जनता के मुद्दों और प्रशासनिक सच्चाई को बिना किसी दबाव के सामने लाते हैं।

पत्रकारिता कौशल एवं अनुभव (Skills & Experience)

मनमोहन को चंदौली जिले के जमीनी मुद्दों, भौगोलिक परिस्थितियों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली की गहरी समझ है। अपराध से जुड़ी घटनाओं की सटीक रिपोर्टिंग और प्रशासनिक कमियों व सुधारों को प्रमुखता से उठाना उनकी मुख्य विशेषता है। तथ्यों की गहराई में जाकर खबर की प्रामाणिकता जांचना उनके काम की शैली का हिस्सा है।

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

एम.जे. (M.J. - Master of Journalism): मनमोहन पत्रकारिता में परास्नातक (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म) की डिग्री से योग्य हैं। उनकी यह उच्च प्रोफेशनल डिग्री और पत्रकारिता की सैद्धांतिक समझ उन्हें जटिल खबरों का तार्किक विश्लेषण करने और समाज के सामने एक जिम्मेदार मीडिया रिपोर्ट प्रस्तुत करने में सक्षम बनाती है।

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