अतिक्रमण पर कार्रवाई एक, दूसरे मामले में खामोशी; अलीनगर में प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल
चंदौली के अलीनगर में तालाब से अतिक्रमण हटाने के बाद सरकारी नाले पर कथित कब्जे को लेकर विवाद गहराया। शिकायतों, निरीक्षण और आईजीआरएस के बावजूद कार्रवाई लंबित, प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल।

चंदौली के अलीनगर क्षेत्र में शनिवार को तालाब की सरकारी भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराती प्रशासन की टीम, जबकि पास के ही नाले पर अतिक्रमण का मामला फिलहाल लंबित है।
चंदौली के अलीनगर क्षेत्र में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के मामलों में प्रशासन की कार्रवाई के तरीके को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। एक ओर तालाब की भूमि से अवैध कब्जा हटाकर प्रशासन ने सक्रियता दिखाई है, वहीं दूसरी ओर लगभग 12 मीटर चौड़े सरकारी नाले पर कथित अतिक्रमण को लेकर लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने से स्थिति चर्चा में है।
जनपद में जलस्रोतों और सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में शनिवार को अलीनगर क्षेत्र में तालाब की भूमि पर हुए अवैध कब्जे को हटाकर प्रशासन ने अपनी कार्रवाई दर्ज की। इस कदम को जहां एक ओर प्रशासनिक सक्रियता के रूप में देखा गया, वहीं इसी क्षेत्र का एक अन्य मामला अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है।
आरोप है कि अलीनगर क्षेत्र में स्थित लगभग 12 मीटर चौड़े एक सरकारी नाले को पिछले करीब छह महीनों से लगातार मिट्टी डालकर पाटा जा रहा है। स्थानीय स्तर पर यह भी बताया जा रहा है कि नाले की भूमि पर धीरे-धीरे निर्माण कार्य भी आगे बढ़ाया जा रहा है, जिसके चलते सरकारी अभिलेखों में दर्ज नाले का एक हिस्सा मौके पर लगभग समाप्त होता दिखाई दे रहा है।
इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों द्वारा कई बार मीडिया के माध्यम से आवाज उठाई गई है और आईजीआरएस पर भी शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। शिकायतों के बाद प्रशासन को इस संबंध में अवगत कराया गया। कुछ दिन पूर्व अपर जिलाधिकारी के निर्देश पर डीडीयू तहसील प्रशासन की टीम ने मौके का निरीक्षण भी किया, लेकिन उसके बाद आगे की कार्रवाई नहीं हो सकी और मामला लंबित बना हुआ है।
एक ही क्षेत्र में तालाब की भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई और वहीं सरकारी नाले पर कथित कब्जे के मामले में निष्क्रियता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि शिकायतों, निरीक्षणों और दस्तावेजी प्रक्रिया के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
अब पूरा मामला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिका हुआ है, जहां यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकारी नाले पर कथित अतिक्रमण के मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और क्या लंबित शिकायतों पर भी उसी तरह की तत्परता दिखाई जाती है जैसी अन्य मामलों में देखने को मिली।

Pratahkal Bureau
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