चंदौली: 12 मीटर चौड़े नाले पर अवैध कब्जा, अलीनगर में बना गंभीर जलभराव का संकट
नाले को मिट्टी से पाटने और फर्जी IGRS निस्तारण रिपोर्ट से भड़के लोग, पैमाइश कराकर अतिक्रमण हटाने की मांग।

तस्वीर में बाईं ओर अधिकारियों की टीम और स्थानीय लोग जलभराव के बीच पैदल चलते नजर आ रहे हैं, जबकि दाईं ओर ट्रैक्टर से जुड़े पंप सेट द्वारा जलजमाव वाले स्थान से पानी बाहर निकाला जा रहा है।
चंदौली। अलीनगर क्षेत्र में करीब 12 मीटर चौड़े सरकारी नाले पर अवैध कब्जे और मिट्टी डालकर उसे पाटे जाने का मामला अब गंभीर जलभराव की समस्या में बदल गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले करीब छह महीनों से नाले को लगातार मिट्टी डालकर पाटा गया और धीरे-धीरे उसकी भूमि पर निर्माण कार्य भी आगे बढ़ाया गया।
नाला पाटे जाने के बाद बारिश का पानी क्षेत्र से निकल नहीं पा रहा है और अलीनगर का बड़ा इलाका जलमग्न हो गया है। जलनिकासी की मूल व्यवस्था बाधित होने के बाद प्रशासन और स्थानीय स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था बनाकर पानी को दूसरे रास्ते से इसी नाले के मार्ग की ओर निकाला जा रहा है। इससे यह सवाल गंभीर हो गया है कि यदि मूल नाले को सुरक्षित रखा गया होता तो शायद जलभराव की यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
मामले में सबसे गंभीर सवाल आईजीआरएस पर दर्ज शिकायत के निस्तारण को लेकर उठ रहे हैं। 12 मीटर चौड़े सरकारी नाले पर अवैध कब्जे की शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार जांच रिपोर्ट में नाले की वास्तविक स्थिति और कथित अतिक्रमण की जांच करने के बजाय “नाले की सफाई/नवीनीकरण करा लिया गया” जैसी रिपोर्ट लगाकर शिकायत का निस्तारण कर दिया गया। लोगों का आरोप है कि इस तरह मूल मुद्दे से हटकर पूरे प्रकरण को गोलमोल तरीके से दबाने का प्रयास किया गया।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार सरकारी अभिलेखों में दर्ज इस नाले का बड़ा हिस्सा मौके पर अपनी वास्तविक स्थिति खोता जा रहा है। कभी क्षेत्र की जलनिकासी का प्रमुख माध्यम रहा यह नाला मिट्टी से पाटे जाने और कथित अतिक्रमण के चलते अपनी उपयोगिता खो चुका है।
मामले को लेकर लोगों ने कई बार मीडिया के माध्यम से भी आवाज उठाई और प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया। शिकायतों के बाद कुछ दिन पूर्व अपर जिलाधिकारी के निर्देश पर डीडीयू तहसील प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण भी किया था, लेकिन निरीक्षण के बाद भी अब तक कोई स्पष्ट और प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकारी अभिलेखों के आधार पर नाले की पैमाइश कराकर उसकी मूल चौड़ाई बहाल करने और कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं की गई तो बारिश के दौरान अलीनगर को बार-बार जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ेगा। अब सवाल यह है कि 12 मीटर चौड़े सरकारी नाले पर कब्जे की शिकायतों के बावजूद वास्तविक स्थिति की जांच कर कार्रवाई कब होगी और अलीनगर को स्थायी जलभराव की समस्या से कब निजात मिलेगी।

Manmohan, Chandauli (Uttar pradesh)
नाम: मनमोहन
पद: रिपोर्टर (प्रातः काल)
कार्यक्षेत्र: चंदौली (उत्तर प्रदेश)
बीट (मुख्य विषय): क्राइम (अपराध) और प्रशासन
मूलमंत्र: निष्पक्ष, बेबाक और तथ्यपरक पत्रकारिता
परिचय (About Manmohan)
मनमोहन उत्तर प्रदेश के चंदौली क्षेत्र के एक सजग, निडर और समर्पित पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल' समाचार पत्र में रिपोर्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मनमोहन मुख्य रूप से क्राइम (अपराध) और स्थानीय प्रशासन से जुड़े मामलों को कवर करते हैं। उनका पत्रकारिता दृष्टिकोण पूरी तरह से "निष्पक्ष, बेबाक और तथ्यपरक" खबरों पर आधारित है, जिससे वे क्षेत्र की जनता के मुद्दों और प्रशासनिक सच्चाई को बिना किसी दबाव के सामने लाते हैं।
पत्रकारिता कौशल एवं अनुभव (Skills & Experience)
मनमोहन को चंदौली जिले के जमीनी मुद्दों, भौगोलिक परिस्थितियों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली की गहरी समझ है। अपराध से जुड़ी घटनाओं की सटीक रिपोर्टिंग और प्रशासनिक कमियों व सुधारों को प्रमुखता से उठाना उनकी मुख्य विशेषता है। तथ्यों की गहराई में जाकर खबर की प्रामाणिकता जांचना उनके काम की शैली का हिस्सा है।
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एम.जे. (M.J. - Master of Journalism): मनमोहन पत्रकारिता में परास्नातक (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म) की डिग्री से योग्य हैं। उनकी यह उच्च प्रोफेशनल डिग्री और पत्रकारिता की सैद्धांतिक समझ उन्हें जटिल खबरों का तार्किक विश्लेषण करने और समाज के सामने एक जिम्मेदार मीडिया रिपोर्ट प्रस्तुत करने में सक्षम बनाती है।
