चंदौली जनपद के मुगलसराय तहसील क्षेत्र के अलीनगर से आईजीआरएस और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शिकायत निस्तारण प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि सरकारी नाले से अतिक्रमण हटाने की शिकायत का समाधान किए बिना केवल कागजी प्रक्रिया पूरी कर शिकायत का निस्तारण दिखा दिया गया।

मामला अलीनगर स्थित 12 मीटर चौड़े सरकारी नाले पर कथित अतिक्रमण से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने आईजीआरएस और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर कई बार शिकायत दर्ज कर सरकारी नाले से अवैध कब्जा हटाकर उसे अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की थी। आरोप है कि महीनों बीत जाने के बाद भी न तो कथित अतिक्रमण हटाया गया और न ही कब्जाधारकों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई की गई।

शिकायतकर्ता का सबसे गंभीर आरोप यह है कि जांच अधिकारी ने शिकायत के मूल विषय को ही बदल दिया। शिकायत जहां सरकारी नाले से अतिक्रमण हटाने की थी, वहीं जांच रिपोर्ट में केवल यह दर्ज कर दिया गया कि "12 मीटर सरकारी नाले का सीमांकन करा दिया गया है।" इसी आधार पर शिकायत का निस्तारण दिखा दिया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि मौके पर आज भी कथित कब्जा जस का तस बना हुआ है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या केवल सीमांकन कर देना ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई माना जाएगा। यदि ऐसा नहीं है तो शिकायत का निस्तारण किस आधार पर किया गया।

पूरे घटनाक्रम ने सरकारी शिकायत निस्तारण प्रणाली की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि शिकायत का वास्तविक समाधान किए बिना केवल औपचारिक रिपोर्ट अपलोड कर फाइल बंद कर दी जाए तो यह न केवल शिकायतकर्ता के साथ अन्याय है, बल्कि आईजीआरएस और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सीधा सवाल खड़ा करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इसी प्रकार शिकायतों का कागजी निस्तारण होता रहा तो सरकारी पोर्टलों पर जनता का भरोसा धीरे-धीरे खत्म हो जाएगा।

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ कथित दलाल और स्थानीय प्रभावशाली लोगों ने जांच प्रक्रिया को प्रभावित किया। आरोप है कि ऐसे लोगों को गवाह बनाकर ऐसी रिपोर्ट तैयार कराई गई, जिससे कथित अतिक्रमणकारियों को अप्रत्यक्ष संरक्षण मिल सके। शिकायतकर्ता के अनुसार लाभ के लालच में कथित रूप से झूठे तथ्यों पर हस्ताक्षर कर पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया गया।

मामले में लेखपाल और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में है। यदि सरकारी नाले पर कब्जा पाया गया था तो उसे हटाने की वैधानिक कार्रवाई क्यों नहीं की गई और यदि कब्जा था ही नहीं तो शिकायतकर्ता को स्पष्ट एवं तथ्यात्मक जवाब क्यों नहीं दिया गया। इन अहम सवालों का अब तक कोई जवाब सामने नहीं आया है, जिससे मामले को लेकर उठ रहे सवाल और गहरे हो गए हैं।

Manmohan, Chandauli (Uttar pradesh)

Manmohan, Chandauli (Uttar pradesh)

नाम: मनमोहन

पद: रिपोर्टर (प्रातः काल)

कार्यक्षेत्र: चंदौली (उत्तर प्रदेश)

बीट (मुख्य विषय): क्राइम (अपराध) और प्रशासन

मूलमंत्र: निष्पक्ष, बेबाक और तथ्यपरक पत्रकारिता

परिचय (About Manmohan)

मनमोहन उत्तर प्रदेश के चंदौली क्षेत्र के एक सजग, निडर और समर्पित पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल' समाचार पत्र में रिपोर्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मनमोहन मुख्य रूप से क्राइम (अपराध) और स्थानीय प्रशासन से जुड़े मामलों को कवर करते हैं। उनका पत्रकारिता दृष्टिकोण पूरी तरह से "निष्पक्ष, बेबाक और तथ्यपरक" खबरों पर आधारित है, जिससे वे क्षेत्र की जनता के मुद्दों और प्रशासनिक सच्चाई को बिना किसी दबाव के सामने लाते हैं।

पत्रकारिता कौशल एवं अनुभव (Skills & Experience)

मनमोहन को चंदौली जिले के जमीनी मुद्दों, भौगोलिक परिस्थितियों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली की गहरी समझ है। अपराध से जुड़ी घटनाओं की सटीक रिपोर्टिंग और प्रशासनिक कमियों व सुधारों को प्रमुखता से उठाना उनकी मुख्य विशेषता है। तथ्यों की गहराई में जाकर खबर की प्रामाणिकता जांचना उनके काम की शैली का हिस्सा है।

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

एम.जे. (M.J. - Master of Journalism): मनमोहन पत्रकारिता में परास्नातक (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म) की डिग्री से योग्य हैं। उनकी यह उच्च प्रोफेशनल डिग्री और पत्रकारिता की सैद्धांतिक समझ उन्हें जटिल खबरों का तार्किक विश्लेषण करने और समाज के सामने एक जिम्मेदार मीडिया रिपोर्ट प्रस्तुत करने में सक्षम बनाती है।

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