उत्तर प्रदेश में जल्द दौड़ेगी बुलेट ट्रेन, दिल्ली से काशी का सफर 3 घंटे 35 मिनट में होगा पूरा
दिल्ली से गुवाहाटी तक प्रस्तावित उत्तरी बुलेट कॉरिडोर को मंजूरी मिल गई है, जिससे प्रमुख शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव बच्चे से मिलते हुए दिख रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का रास्ता जल्द खुलने वाला है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 31 अक्टूबर, 2026 को वाराणसी में इसकी घोषणा करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री ने उत्तरी बुलेट कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है। दिल्ली से गुवाहाटी तक प्रस्तावित यह कॉरिडोर उत्तर प्रदेश सहित कई प्रमुख शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम करेगा। रेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि बुलेट ट्रेन केवल अमीरों के लिए नहीं, बल्कि गरीब और मध्यम परिवारों के लोगों के लिए भी होगी।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास कार्यों और गंगा नदी पर निर्माणाधीन नमो गंगा रेल-सह-सड़क पुल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्टेशन के आधुनिकीकरण, नए स्टेशन भवन, कॉनकोर्स, प्लेटफॉर्म और यात्री सुविधाओं से जुड़े निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने नमो गंगा पुल के निर्माण स्थल पर पहुंचकर तकनीकी व्यवस्थाओं और परियोजना की स्थिति का भी जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान रेल मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री ने उत्तरी बुलेट कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है और उत्तर प्रदेश में इसका निर्माण जल्द होने वाला है। दिल्ली से गुवाहाटी तक तैयार होने वाले इस कॉरिडोर से प्रमुख शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। प्रस्तावित समय-सारणी के अनुसार दिल्ली से आगरा के बीच की दूरी 59 मिनट में, दिल्ली से कानपुर की दूरी 1 घंटे 59 मिनट में और दिल्ली से लखनऊ की दूरी 2 घंटे 12 मिनट में तय की जा सकेगी। वहीं, काशी से लखनऊ पहुंचने में 1 घंटे 21 मिनट और काशी से पटना पहुंचने में 1 घंटे का समय लगेगा। काशी से दिल्ली की यात्रा 3 घंटे 35 मिनट और वाराणसी से आगरा की यात्रा 2 घंटे 24 मिनट में पूरी हो सकेगी।
बुलेट ट्रेन के किराये को लेकर विपक्ष की ओर से भ्रम फैलाए जाने की बात पर रेल मंत्री ने कहा कि बुलेट ट्रेन अमीरों के लिए नहीं, बल्कि गरीब और मध्यम परिवारों के लोगों के लिए भी है। उन्होंने कहा कि विपक्ष किराया बहुत अधिक होने का भ्रम फैला रहा है, जबकि इसका किराया हवाई जहाज के किराये से भी कम होगा।
इसके बाद रेल मंत्री ने काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्टेशन को आधुनिक, विश्वस्तरीय और यात्री अनुकूल स्वरूप में विकसित किया जा रहा है। परियोजना की स्वीकृत अनुमानित लागत 349.50 करोड़ रुपये है, जबकि 304.61 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण कार्य आवंटित किया गया है। कार्य आवंटन की तिथि 16 अगस्त, 2023 है। परियोजना का निष्पादन उत्तर रेलवे के निर्माण संगठन की संबंधित इकाई कर रही है।
पुनर्विकास योजना के तहत स्टेशन के उत्तर और दक्षिण दिशा में दो आधुनिक स्टेशन भवन बनाए जा रहे हैं। दोनों भवन जी+2 यानी ग्राउंड प्लस दो मंजिल के होंगे। प्रत्येक भवन का क्षेत्रफल लगभग 10,358 वर्ग मीटर निर्धारित किया गया है। इसके अलावा लगभग 10,622 वर्ग मीटर क्षेत्र में विशाल कॉनकोर्स का निर्माण किया जा रहा है। यात्रियों की आवाजाही सुगम बनाने के लिए 9 मीटर चौड़ा फुट ओवर ब्रिज, नए प्लेटफॉर्म, प्लेटफॉर्म शेड एवं कवरिंग, पैदल यात्रियों के लिए कवर्ड पाथवे और कॉनकोर्स के ऊपर रूफिंग सहित अन्य विकास कार्य भी परियोजना में शामिल हैं।
पुनर्विकास पूरा होने के बाद काशी रेलवे स्टेशन की परिचालन क्षमता में बड़ा बदलाव होगा। वर्तमान में स्टेशन पर 4 रेलवे ट्रैक उपलब्ध हैं, जिन्हें बढ़ाकर 10 किया जाएगा। प्लेटफॉर्म की संख्या भी 4 से बढ़ाकर 6 की जाएगी। प्रत्येक प्लेटफॉर्म की लंबाई 600 मीटर होगी। स्टेशन पर वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 1,954 यात्रियों की क्षमता है, जो पुनर्विकास के बाद बढ़कर 13,261 यात्री प्रतिदिन हो जाएगी। इसी तरह ट्रेनों की संख्या वर्तमान 16 जोड़ी से बढ़कर 36 जोड़ी तक हो सकेगी।
यात्रियों की सुविधा के लिए स्टेशन पर 30 लिफ्ट और 23 एस्केलेटर लगाए जाएंगे। फुट ओवर ब्रिज की चौड़ाई वर्तमान 6 मीटर से बढ़ाकर 9 मीटर की जाएगी। वहीं, सीढ़ियों की संख्या 3 से बढ़ाकर 26 की जाएगी। इससे यात्रियों को एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म तक पहुंचने और स्टेशन के विभिन्न हिस्सों में आवागमन करने में सुविधा मिलेगी।
स्टेशन पर प्रतीक्षालय और बैठने की व्यवस्था का भी विस्तार किया जा रहा है। उत्तर और दक्षिण स्टेशन भवनों में लगभग 2,300-2,300 वर्ग मीटर क्षेत्रफल के प्रतीक्षालय विकसित किए जाएंगे। प्रत्येक प्रतीक्षालय में लगभग 650 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी। इसके अतिरिक्त लगभग 5,114 वर्ग मीटर के कॉनकोर्स क्षेत्र में करीब 1,800 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था की जाएगी। इस तरह कुल लगभग 9,714 वर्ग मीटर क्षेत्र में करीब 3,100 यात्रियों के बैठने की सुविधा उपलब्ध होगी।
स्टेशन परिसर की पार्किंग व्यवस्था को भी विस्तारित किया जाएगा। वर्तमान में यहां 115 ईसीएस (इक्विवेलेंट कार स्पेस) की पार्किंग क्षमता उपलब्ध है। पुनर्विकास योजना के तहत लगभग 10,175 वर्ग मीटर क्षेत्र में 440 ईसीएस की पार्किंग सुविधा विकसित की जाएगी। भविष्य में इस क्षमता को 800 ईसीएस तक बढ़ाने की योजना भी प्रस्तावित है।
इसके अलावा स्टेशन परिसर में लगभग 66,758 वर्ग मीटर क्षेत्र में बाहरी विकास कार्य किए जाएंगे। लगभग 2,021 वर्ग मीटर क्षेत्र में पैदल यात्रियों के लिए कवर्ड पाथवे बनाया जाएगा, जबकि लगभग 10,622 वर्ग मीटर क्षेत्र में कॉनकोर्स के ऊपर रूफिंग का निर्माण प्रस्तावित है। इन कार्यों से स्टेशन परिसर का समग्र विकास होगा और यात्रियों को मौसम के अनुकूल सुरक्षित एवं सुविधाजनक आवागमन की सुविधा मिलेगी।
काशी रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास वाराणसी की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्ता को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद स्टेशन की यात्री क्षमता, रेल परिचालन और आवागमन व्यवस्था में व्यापक सुधार होगा। आधुनिक स्टेशन भवन, विशाल कॉनकोर्स, विस्तृत प्लेटफॉर्म, लिफ्ट, एस्केलेटर, बेहतर प्रतीक्षालय और पार्किंग जैसी सुविधाओं से यात्रियों को बेहतर रेल यात्रा का अनुभव मिलेगा।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसके बाद गंगा नदी पर निर्माणाधीन नमो गंगा रेल-सह-सड़क पुल (नमो ब्रिज) का निरीक्षण किया। यह महत्वपूर्ण परियोजना उत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल के अंतर्गत निर्मित की जा रही है। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों, तकनीकी व्यवस्थाओं और परियोजना की प्रगति की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
लगभग 1,074.6 मीटर लंबाई वाले इस पुल की स्वीकृत अनुमानित लागत 1,380.87 करोड़ रुपये है। इसके निर्माण के लिए 1,201.37 करोड़ रुपये की लागत से अनुबंध आवंटित किया गया है। परियोजना के तहत कुल 10 स्पैन बनाए जाने हैं। इनमें 108.5 मीटर के 8 स्पैन और 103.3 मीटर के 2 स्पैन शामिल हैं। पुल की आधारभूत संरचना के लिए 9 पियर और 2 एबटमेंट सहित कुल 11 सब-स्ट्रक्चर बनाए जा रहे हैं। इसके लिए 60 मीटर तक की गहराई वाले डबल-डी वेल का निर्माण भी प्रस्तावित है।
नमो गंगा पुल की प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें रेल और सड़क यातायात के लिए दो अलग-अलग स्तर विकसित किए जा रहे हैं। पुल के निचले तल पर रेल परिचालन के लिए कुल चार रेल लाइनें बनाई जा रही हैं, जिनमें दो अप और दो डाउन लाइनें होंगी। इन पर 2×25 केवी ओवरहेड इलेक्ट्रिक उपकरण (ओएचई) प्रणाली स्थापित की जाएगी।
वहीं, पुल के ऊपरी तल पर छह लेन के राष्ट्रीय राजमार्ग के अनुरूप सड़क मार्ग विकसित किया जा रहा है। इसमें विद्युत व्यवस्था, क्रैश बैरियर और अन्य आवश्यक सड़क सुरक्षा सुविधाएं शामिल होंगी।
निरीक्षण के दौरान रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। उन्होंने रेल मंत्री को काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास कार्यों की प्रगति और प्रस्तावित यात्री सुविधाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की घोषणा के साथ काशी स्टेशन के आधुनिकीकरण और नमो गंगा रेल-सह-सड़क पुल की प्रगति वाराणसी की रेल एवं सड़क संपर्क व्यवस्था से जुड़ी प्रमुख परियोजनाओं के रूप में सामने आई है।

