हत्या के मामले में पांच आरोपियों को उम्रकैद, प्रत्येक पर 1.15 लाख रुपये जुर्माना
बुलंदशहर हत्या मामले में पांच आरोपियों को उम्रकैद और प्रत्येक पर 1.15 लाख रुपये जुर्माना, 22 सितंबर को एडीजे अनूपशहर ने सुनाया फैसला।

तस्वीर में जिला एवं सत्र न्यायालय बुलंदशहर का मुख्य प्रवेश द्वार दिखाई दे रहा है।
बुलंदशहर में हत्या के मामले में पांच आरोपियों को दोषी करार देते हुए न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने प्रत्येक आरोपी पर 1.15 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया। यह फैसला ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत बुलंदशहर पुलिस की प्रभावी पैरवी के बाद सामने आया।
पुलिस के अनुसार, रामेश्वर पुत्र दीपचन्द निवासी कुलमी का नगला थाना नरौरा, शैलेन्द्र पुत्र शंकर लाल, पुष्पेन्द्र पुत्र चरन सिंह निवासी मौसमपुर थाना अतरौली, विवेक पुत्र मोहनलाल निवासी औरेनी थाना अतरौली और राजू उर्फ राजवीर पुत्र बाबूराम निवासी सूरतगढ़ थाना अतरौली ने वर्ष 2024 में शीशपाल के गले में फंदा डालकर चाकू से हत्या की थी।
इस मामले में 8 नवंबर 2024 को थाना डिबाई में मुकदमा अपराध संख्या 602/24 के तहत धारा 103(1), 3(5) और 61(2) बीएनएस में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने विवेचना पूरी करने के बाद 26 दिसंबर 2024 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया।
ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत मामले को चिन्हित किए जाने के बाद बुलंदशहर पुलिस के मॉनीटरिंग सेल ने न्यायालय में प्रभावी पैरवी की। अभियोजन पक्ष की ओर से अभियोजक प्रवेन्द्र सिंह लोधी, मॉनीटरिंग सेल प्रभारी निरीक्षक पंकज राय, पैरोकार कांस्टेबल सचिन कुमार और कोर्ट मोहर्रिर कांस्टेबल संजीव कुमार ने मामले की पैरवी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
22 सितंबर 2026 को एडीजे अनूपशहर न्यायालय के न्यायाधीश राजेश कुमार तृतीय ने पांचों आरोपियों को दोषी करार दिया। न्यायालय ने रामेश्वर, शैलेन्द्र, पुष्पेन्द्र, विवेक और राजू उर्फ राजवीर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई तथा प्रत्येक पर 1.15 लाख रुपये अर्थदंड लगाया। इस फैसले के साथ हत्या के मामले में न्यायालय की कार्रवाई पूरी हुई और पुलिस की प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप पांचों आरोपियों को दोषसिद्धि मिली।

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