भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन ओपन सेशन की शुरुआत वैश्विक चुनौतियों और उनके असर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के साथ हुई। सत्र से पहले हुई सामूहिक ग्रुप फोटो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक साथ खड़े नजर आए। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया में बढ़ता तनाव आम नागरिकों की जिंदगी के साथ-साथ वैश्विक सप्लाई चेन पर भी सीधा और नकारात्मक असर डाल रहा है।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि महामारी, जलवायु आपदाओं और भू-राजनीतिक संकटों ने यह साबित कर दिया है कि दुनिया के देश आज एक-दूसरे से पूरी तरह जुड़े हुए हैं। ऐसे में किसी एक क्षेत्र में पैदा होने वाला संकट पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स के चार मुख्य स्तंभों रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स के माध्यम से समावेशी वैश्विक विकास को बढ़ावा दिया गया है। भारत का मानना है कि ब्रिक्स के मंच से विकसित समाधानों का लाभ केवल सदस्य देशों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह पूरे ग्लोबल साउथ और विश्व समुदाय तक पहुंचना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्मार्ट ग्रिड्स और एनर्जी स्टोरेज के लिए ब्रिक्स डिजिटल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया गया है। इससे क्लीन एनर्जी सिस्टम को अधिक रिलायबल, एफिशिएंट और एक्सेसिबल बनाने में मदद मिलेगी। एग्रो इकोलॉजी और रिजेनरेटिव एग्रीकल्चर के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पारंपरिक ज्ञान को मॉडर्न साइंस से जोड़ेंगे। वहीं, कम्युनिटी बेस्ड क्लाइमेट एडाप्टेशन के लिए तैयार किए गए सिद्धांत इंडिजिनस नॉलेज को क्लाइमेट एक्शन का महत्वपूर्ण आधार बनाएंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इन चारों स्तंभों पर आगे बढ़ते हुए ब्रिक्स के माध्यम से इनक्लूसिव ग्लोबल ग्रोथ को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया है। उनका कहना था कि ब्रिक्स में विकसित सॉल्यूशंस का लाभ केवल ब्रिक्स तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

छोटे उद्यमों को नॉलेज, फाइनेंस और नए मार्केट से जोड़ने के लिए ब्रिक्स एमएसएमई कोऑपरेशन पोर्टल का इनिशिएटिव लिया गया है। इसके साथ ही शहरों के बीच बेस्ट प्रैक्टिस साझा करने के लिए ब्रिक्स अर्बन मोबिलिटी हब की स्थापना की गई है।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय सभ्यता में प्रकृति को दिए गए महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि सदियों से यह मान्यता रही है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विकल्प नहीं, बल्कि पूरक हैं। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स में भी मानव विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन पर बल दिया गया है। यही सस्टेनेबिलिटी का आधार है और भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व भी है।

‘ब्रिक्स इंटीग्रेटेड अर्ली वार्निंग सिस्टम’ बनाने पर सहमति

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इसी वजह से भारत ने ब्रिक्स देशों को संकटों से निपटने के लिए पहले से तैयार रखने पर खास जोर दिया है। इसके तहत संक्रामक बीमारियों को फैलने से रोकने और उनसे निपटने के लिए ‘ब्रिक्स इंटीग्रेटेड अर्ली वार्निंग सिस्टम’ बनाने पर सहमति बनी है।

इसके अलावा आपदाओं से निपटने के लिए अर्ली वार्निंग डेटा इंटीग्रेशन गाइडलाइंस भी तैयार की गई हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है और इसका सीधा असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है। महामारी, जलवायु आपदाओं और सप्लाई चेन में रुकावटों ने दिखाया है कि आज दुनिया के देश एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। ऐसे में किसी एक जगह आने वाला संकट दूसरे देशों को भी प्रभावित कर सकता है।

जिनपिंग बीजिंग के लिए रवाना

ब्रिक्स के 18वें शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत दौरे पर आए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का आधिकारिक दौरा खत्म हो गया है। राष्ट्रपति जिनपिंग रविवार को ओपन सेशन में शामिल होने के बाद सुबह 11.45 के करीब नई दिल्ली से बीजिंग के लिए रवाना हो गए।

ब्रिक्स का दायरा कैसे बढ़ा?

ब्रिक्स में शुरुआत में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब इसके सदस्य बने। इसके बाद 2025 में इंडोनेशिया भी ब्रिक्स में शामिल हुआ।

पिछले साल बेलारूस, बोलीविया, कजाखस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम को ब्रिक्स साझेदार देश बनाया गया। शिखर सम्मेलन के पहले दिन चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई शीर्ष नेता और प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

Om Prakash Pal

Om Prakash Pal

नाम: ओम प्रकाश पाल

वर्तमान पद: स्वतंत्र पत्रकार, लेखक एवं स्तंभकार

कार्यक्षेत्र: नेशनल ब्यूरो (राष्ट्रीय स्तर)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, संसद, केंद्रीय मंत्रालय, कृषि, साहित्य, खेल एवं प्रशासन (बिजनेस को छोड़कर सभी विषयों पर कार्य)

पत्रकारिता अनुभव: लगभग 39 वर्ष

परिचय एवं अनुभव 

ओम प्रकाश पाल पिछले 39 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर नेशनल ब्यूरो में विशेष संवाददाता के रूप में लगभग 20 वर्षों तक संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) की रिपोर्टिंग की है।

एक मान्यता प्राप्त पत्रकार के रूप में उन्होंने केंद्रीय गृह, रक्षा, रेलवे, सड़क परिवहन, श्रम एवं रोजगार, जलशक्ति और कृषि जैसे प्रमुख केंद्रीय मंत्रालयों को कवर किया है।

विभिन्न समाचार पत्रों में योगदान:

  • अमर उजाला एवं दैनिक जागरण: पत्रकारिता के शुरुआती वर्षों का अनुभव।
  • शाह टाइम्स: न्यूज़ एडिटर (News Editor) के पद पर सेवाएं।
  • हरिभूमि (दिल्ली): वरिष्ठ संवाददाता के रूप में कार्य।

राजनीति विज्ञान और कृषि विषयों के जानकार होने के साथ-साथ उन्होंने साहित्य और खेल के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्य किया है। वर्तमान में वह एक स्वतंत्र पत्रकार, लेखक और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

शैक्षणिक योग्यता 

  • स्नातक (Graduate)
  • B.Ed (बैचलर ऑफ एजुकेशन)
  • पत्रकारिता में डिप्लोमा (Diploma in Journalism)
  • साहित्य रत्न
  • कृषि विशारद

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