बाराबंकी में हत्या के प्रयास के दोषी नन्द किशोर को 10 साल की कठोर कैद, 60 हजार जुर्माना
बाराबंकी न्यायालय ने वर्ष 2015 के हत्या के प्रयास मामले में ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत सख्त पैरवी के बाद अभियुक्त को सजा सुनाई।

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में स्थित थाना कोठी परिसर, जहां दर्ज वर्ष 2015 के हत्या के प्रयास मामले में न्यायालय ने अभियुक्त को 10 वर्ष की सजा सुनाई है।
बाराबंकी: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में हत्या के प्रयास के मामले में न्यायालय ने अभियुक्त नन्द किशोर उर्फ नन्दू तिवारी को 10 वर्ष के कठोर कारावास और 60 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत जघन्य अपराधों में शामिल अभियुक्तों को सजा दिलाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के दौरान यह फैसला आया। पुलिस की प्रभावी पैरवी और न्यायालय में साक्ष्यों को मजबूती से प्रस्तुत किए जाने के बाद अभियुक्त को दोषसिद्ध किया गया।
पुलिस अधीक्षक रवीना त्यागी के निर्देशन में जघन्य अपराधों से संबंधित चिन्हित अभियोगों में गुणवत्तापूर्ण विवेचना, वैज्ञानिक विधि से साक्ष्य संकलन और न्यायालय में प्रभावी पैरवी की जा रही है। इसी क्रम में थाना कोठी में दर्ज हत्या के प्रयास के मुकदमे में सेमरावां निवासी नन्द किशोर उर्फ नन्दू तिवारी पुत्र राजनरायण उर्फ रज्जू को दोषी ठहराया गया।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कोर्ट संख्या-10, बाराबंकी ने अभियुक्त को भारतीय दंड संहिता की धारा 307 और आर्म्स एक्ट की धारा 3/25 के तहत दोषसिद्ध करते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास तथा 60 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
मामला चार जुलाई 2015 का है। उस दिन थाना कोठी क्षेत्र के ग्राम रहीमपुर निवासी वीनू पत्नी गंगाराम ने पुलिस को सूचना दी थी कि उनके पति की जान लेने की नीयत से हमला किया गया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा अपराध संख्या 101/2015 दर्ज किया। इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 307 और आर्म्स एक्ट की धारा 3/25 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
मामले की विवेचना तत्कालीन विवेचक उपनिरीक्षक संजीव कुमार सिंह ने की। उन्होंने साक्ष्य संकलित कर विवेचना पूरी की और अभियुक्त के विरुद्ध न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। इसके बाद मुकदमे की सुनवाई के दौरान पुलिस और अभियोजन पक्ष ने प्रभावी पैरवी करते हुए साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया।
इस मामले में एडीजीसी सुनील कुमार दुबे, मॉनीटरिंग सेल प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार यादव, उपनिरीक्षक अमर बहादुर सिंह, मॉनीटरिंग सेल के पुलिसकर्मियों और थाना कोठी के पैरोकार ने प्रभावी पैरवी में भूमिका निभाई। पुलिस के अनुसार, ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत इस अभियोग को जघन्य एवं सनसनीखेज अपराध के रूप में चिन्हित किया गया था।
पुलिस ने इस फैसले को अपराधियों को सजा दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता बताया है। मामले में विवेचना से लेकर न्यायालय में प्रभावी पैरवी तक किए गए प्रयासों के बाद हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट से जुड़े अपराध में अभियुक्त को कठोर कारावास की सजा मिली है।

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