एटा जनपद के जैथरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बाहर दर्जनों आशा और संगिनी कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की। आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने 20 हजार रुपये मानदेय किए जाने की मांग उठाते हुए कहा, “दो हजार में दम नहीं, बीस हजार से कम नहीं।”

प्रदर्शन के दौरान आशा और संगिनी कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर काफी देर तक डटी रहीं। इसके बाद दर्जनों महिलाओं ने चिकित्सा अधीक्षक अनुज कुमार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी के नाम लिखित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आशा स्वास्थ्य कार्यकत्रियों को 20 हजार रुपये मानदेय दिए जाने की मांग की गई।

कार्यकर्ताओं ने मांग की कि आशा स्वास्थ्य कार्यकत्रियों को शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए। आशा कार्यकत्रियों का वेतन भारत सरकार द्वारा मजदूरी के हिसाब से मासिक वेतन निर्धारित किया जाए। इसके साथ ही आशा कर्मियों को यात्रा भत्ता, साइकिल, स्टेशनरी आदि का खर्च दिए जाने तथा आशा कक्ष की व्यवस्था किए जाने की मांग रखी गई।

ज्ञापन में आशा कार्यकर्ताओं ने कोरोना काल से जुड़ी अपनी समस्या भी उठाई। उन्होंने कहा कि जिस दिन से कोरोना काल चला, तब से उन्हें कोई पैसा नहीं दिया गया, जबकि कोरोना काल में उन्होंने ड्यूटी की थी। उनका कहना है कि जान खतरे में डालकर उनसे काम कराया गया, फिर भी उनके बारे में नहीं सोचा गया। कार्यकर्ताओं ने कोरोना काल का पैसा तत्काल दिए जाने की मांग की।

आशा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उनसे एक माह में चार डिलीवरी कराने की मांग की जाती है और धमकी दी जाती है कि अगर डिलीवरी नहीं कराओगी तो तुम्हें हटा देंगे और दूसरी लगा देंगे। कार्यकर्ताओं ने कहा कि उनसे आईओसीडी भी चाहिए, नसबंदी भी चाहिए, घर-घर कंडोम भी बंटवाए जाते हैं और अन्तरा भी लगवाया जाता है। ऐसे में इतनी डिलीवरी कहां से लाई जाएं।

कार्यकर्ताओं ने अन्तरा लगवाने से लाभार्थी को होने वाली परेशानी का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि जब आशा बहुएं इस संबंध में अधिकारियों से कहती हैं तो उनकी सुनवाई नहीं होती। वहीं गांव के लोग भी आशा बहनों से उल्टा-सीधा बोलते हैं और आरोप लगाते हैं कि आशाएं जबरदस्ती उनके घर में घुसकर गुमराह करती हैं तथा बुलाकर सीएचसी पर ले जाती हैं।

आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि इन परिस्थितियों में आशा बहुओं को जनता की भी सुननी है, अधिकारियों की भी सुननी है और घर पर घरवालों की भी सुननी है। उन्होंने सवाल उठाया, “अब क्या आशा खुद ही मर जाएं।”

प्रदर्शन करने वालों में सुषमा चतुर्वेदी, मंडल अध्यक्ष, सीमा देवी, रीना देवी, निशा देवी, नीलम देवी, रामादेवी, मृदुल, मंजू शाक्य, ममता, रीना चौहान, सुमन लता, अनीता शर्मा, रेखा देवी, सीमा, नीतू, प्रीति, सविता, पुष्पा देवी, कल्पना, निशा सिंह, शिक्षा कुमारी सहित दर्जनों महिलाएं मौजूद रहीं। कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन के माध्यम से अपनी मांगों और समस्याओं के समाधान की मांग उठाई।

Vikas Dube, Etah and Kasganj (Uttar pradesh)

Vikas Dube, Etah and Kasganj (Uttar pradesh)

विकास दुबे एटा और कासगंज जनपद में सक्रिय पत्रकार हैं, जो स्थानीय मुद्दों, प्रशासनिक गतिविधियों, स्वास्थ्य, शिक्षा और अपराध से जुड़ी खबरों की गहन और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करते हैं। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों की जमीनी हकीकत को सरल एवं प्रभावशाली भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी विशेष पहचान है। जनसरोकार से जुड़े विषयों पर सतत सक्रिय रहते हुए वे क्षेत्र की महत्वपूर्ण घटनाओं को प्रमुखता से सामने लाने का कार्य कर रहे हैं।

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