उत्तर प्रदेश के संभल जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने न केवल स्थानीय लोगों को बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। एक 9 साल की मासूम बच्ची, जो अपनी मां और दादी के साथ खेत में जा रही थी, आवारा कुत्तों के झुंड का शिकार बन गई। कुत्तों की क्रूरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे बच्ची को नोचते रहे और उसका एक हाथ शरीर से अलग कर अपने साथ ले गए। इस वीभत्स घटना ने एक बार फिर देश में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक और प्रशासन की लाचारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

घटना संभल जिले के पोटा गांव की है। रविवार की शाम, 9 वर्षीय मासूम अपनी मां और दादी के साथ मवेशियों के लिए चारा लेने खेतों की ओर जा रही थी। तभी अचानक आवारा कुत्तों के एक आक्रामक झुंड ने उस पर हमला बोल दिया।

  • कुत्तों का खौफनाक हमला: कुत्तों ने बच्ची को चारों तरफ से घेर लिया और उसे बुरी तरह नोचना शुरू कर दिया। बच्ची की चीख-पुकार सुनकर परिजन और आसपास के लोग जब तक दौड़कर मौके पर पहुंचे, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
  • वीभत्स दृश्य: प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुत्तों ने बच्ची के शरीर को बुरी तरह क्षत-विक्षत कर दिया था। दरिंदगी की हद यह थी कि कुत्ते बच्ची का एक हाथ काटकर (नोचकर) अपने साथ खींच ले गए।
  • मौत की पुष्टि: परिजन आनन-फानन में खून से लथपथ बच्ची को अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अस्पताल पहुंचने से पहले ही मासूम ने दम तोड़ दिया था।

देशव्यापी संकट और सुप्रीम कोर्ट का रुख

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब भारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) आवारा कुत्तों के प्रबंधन को लेकर गंभीर मंथन कर रहा है। देश में आवारा कुत्तों की संख्या 3 से 6 करोड़ के बीच आकी गई है, जो लगातार बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा बन रहे हैं।

  • अदालत के निर्देश: सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को मारने (Culling) के व्यापक अभियान को खारिज करते हुए, नसबंदी किए गए जानवरों को आश्रय स्थलों (Shelters) में स्थानांतरित करने का आदेश दिया है। हालांकि, जमीनी स्तर पर इन आदेशों का पालन चुनौती बना हुआ है।
  • तेलंगाना की घटना: इस संकट की गंभीरता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि संभल की घटना के ठीक एक दिन बाद, तेलंगाना में ग्रामीणों द्वारा लगभग 300 आवारा कुत्तों को जहर देकर मारने का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में 9 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह दर्शाता है कि कुत्तों के हमलों से परेशान लोग अब कानून को अपने हाथ में लेने को मजबूर हो रहे हैं।

प्रशासन और सुरक्षा पर सवाल

संभल की इस घटना ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

महत्वपूर्ण बिंदु:

  • देश भर में आवारा कुत्तों के हमलों में बच्चों की मौत के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं।
  • पोटा गांव में इस घटना के बाद से मातम और दहशत का माहौल है।
  • लोग अब अपने बच्चों को घर से बाहर भेजने में भी डर रहे हैं।

एक हंसती-खेलती बच्ची का इस तरह दर्दनाक अंत समाज और व्यवस्था के लिए एक चेतावनी है। जहां एक तरफ पशु प्रेम और क्रूरता निवारण कानून हैं, वहीं दूसरी तरफ मासूम जिंदगियों की सुरक्षा का सवाल है। संभल की यह घटना महज एक हादसा नहीं, बल्कि उस सिस्टम की विफलता है जो इंसानी जान और आवारा जानवरों के बीच संतुलन बनाने में नाकाम साबित हो रहा है। प्रशासन को जल्द से जल्द इस समस्या का स्थायी समाधान खोजना होगा, ताकि फिर किसी मासूम को ऐसी दर्दनाक मौत न मिल सके।

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Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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