खेरवाड़ा। विद्या भारती राजस्थान के क्षेत्रीय संस्कार केंद्र प्रमुखों की बैठक में संगठन मंत्री गोविंद कुमार ने कहा कि किसी भी कार्य की प्रभावी क्रियान्विति के लिए उचित प्रशिक्षण और निरंतर अभ्यास आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संस्कार केंद्र संचालकों का चयन सोच-समझकर किया जाए तथा उन्हें नियमित प्रशिक्षण देकर कार्य को परिणामकारी बनाया जाए।

गोविंद कुमार ने कहा कि संस्कार केंद्र विद्यालय का दर्पण होता है। इसकी प्रभावी कार्यप्रणाली के लिए नियमित प्रवास, केंद्र प्रभारियों की सक्रियता, प्रबंध समिति का सहयोग तथा योजनाबद्ध कार्यशैली आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संस्कार केंद्र इतने प्रभावशाली होने चाहिए कि समाज के प्रतिष्ठित लोगों को भी उनका अवलोकन कराया जा सके। साथ ही उन्होंने केंद्रों के माध्यम से विद्यार्थियों के कौशल विकास, संस्कार निर्माण तथा नशामुक्ति अभियान को गति देने का आह्वान किया।

इससे पूर्व उद्घाटन सत्र में विद्या भारती के अखिल भारतीय मंत्री शिव प्रसाद ने मार्गदर्शन प्रदान किया। कार्यक्रम में अखिल भारतीय संयोजक रामस्वरूप शर्मा, क्षेत्रीय संस्कार केंद्र प्रमुख महिपाल, किसनाराम एवं पूनमचंद उपस्थित रहे। विद्या भारती संस्थान उदयपुर के सचिव कालूलाल चौबीसा ने अतिथियों का स्वागत एवं परिचय कराया। मां सरस्वती एवं भारत माता के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।

बैठक का संचालन बुद्धाराम, राजेंद्र एवं राजेश कुमार चौबीसा ने किया। बैठक में राजस्थान एवं मेवात क्षेत्र के लगभग 40 कार्यकर्ताओं ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसकी जानकारी जिला प्रचार प्रमुख ने दी। यह बैठक संस्कार केंद्रों के प्रभावी संचालन, कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण तथा समाज और विद्यार्थियों के समग्र विकास के उद्देश्य से आयोजित की गई।

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Dinesh Kumar Jain, Kherwara(Udaipur)

Dinesh Kumar Jain, Kherwara(Udaipur)

दिनेश कुमार जैन पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी और विश्वसनीय नाम हैं। उन्होंने पिछले लगभग 8 वर्षों से प्रिंट मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय रहकर जनहित से जुड़े मुद्दों, प्रशासनिक गतिविधियों, ग्रामीण विकास, सामाजिक सरोकारों तथा स्थानीय समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है।

उन्होंने जनवरी 2020 से प्रतिष्ठित समाचार पत्र दैनिक नवज्योति में संवाददाता, खेरवाड़ा एवं नयागांव ब्लॉक (जिला उदयपुर) के रूप में कार्य करते हुए तहसील एवं ब्लॉक स्तर की खबरों को प्रभावी ढंग से पाठकों तक पहुंचाया। इससे पूर्व वे लगभग दो वर्षों तक राजस्थान पत्रिका से भी जुड़े रहे, जहां उन्होंने क्षेत्रीय पत्रकारिता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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