गौरवशाली इतिहास और आदर्श आचार्य पर बौद्धिक मंथन, प्रशिक्षण वर्ग में मिला प्रेरक मार्गदर्शन
विद्या भारती जनजाति शिक्षा समिति राजस्थान द्वारा उदयपुर में आयोजित प्रशिक्षण वर्ग में मुख्य वक्ता पन्नालाल तेली और तिलकेश जोशी ने आचार्यों को भारतीय संस्कृति एवं शिक्षक धर्म का बोध कराया।

उदयपुर जिले में आयोजित नवीन आचार्य प्रशिक्षण वर्ग के बौद्धिक सत्र के दौरान (मंच पर) उपस्थित अतिथि वक्ता तथा दरी पर अनुशासित बैठकर मार्गदर्शन प्राप्त करते विद्या भारती के संभोगी आचार्य।
विद्या भारती जनजाति शिक्षा समिति राजस्थान, जिला उदयपुर द्वारा आयोजित नवीन आचार्य प्रशिक्षण वर्ग में शुक्रवार को आयोजित बौद्धिक सत्र ज्ञान, संस्कृति और शिक्षक धर्म के विविध आयामों पर केंद्रित रहा। सत्र में वक्ताओं ने भारत के गौरवशाली इतिहास, सांस्कृतिक विरासत तथा आदर्श आचार्य की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए प्रशिक्षार्थियों को प्रेरणादायी मार्गदर्शन प्रदान किया।
सत्र के मुख्य वक्ता धर्म जागरण विभाग के सहायक पन्नालाल तेली ने “हमारा गौरवशाली इतिहास” विषय पर संबोधित करते हुए भारत के स्वर्णिम अतीत, सांस्कृतिक वैभव और महापुरुषों के योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत प्राचीन काल से ही ज्ञान, संस्कृति और समृद्धि का वैश्विक केंद्र रहा है। इस दौरान उन्होंने सोमनाथ मंदिर की ऐतिहासिक समृद्धि, विदेशी आक्रांताओं के आक्रमणों तथा विपरीत परिस्थितियों में भारतीय समाज द्वारा अपनी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के प्रयासों पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने सुरमालदास के लसूडिया आंदोलन, संत मावजी द्वारा निष्कलंक संप्रदाय की स्थापना तथा उनकी भविष्यवाणियों का उल्लेख करते हुए भारतीय संत परंपरा की महत्ता को रेखांकित किया। साथ ही गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस और भारतीय संस्कृति के संरक्षण में महापुरुषों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। महाराणा प्रताप एवं छत्रपति शिवाजी महाराज के त्याग, शौर्य और धर्म-संस्कृति रक्षा के योगदान को प्रेरक उदाहरणों के रूप में प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम में विद्या भारती के सहसचिव कल्पेश ठाकुर एवं जिला प्रवासी मनसुखलाल बोडात भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर विकास पब्लिक स्कूल, खेरवाड़ा के संस्थापक तिलकेश जोशी ने “आदर्श आचार्य” विषय पर मार्गदर्शन देते हुए कहा कि शिक्षक का आचरण ही उसकी सबसे बड़ी पहचान और प्रभाव का आधार होता है। उन्होंने संस्कार, व्यवहार, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में आचार्य की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
तिलकेश जोशी ने महान वैज्ञानिक आर्यभट्ट के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रेष्ठ आचरण और सकारात्मक दृष्टिकोण से ही समाज में रचनात्मक परिवर्तन संभव है। उन्होंने प्रशिक्षार्थी आचार्यों से शिक्षा के साथ-साथ संस्कार निर्माण को भी अपनी प्राथमिकता बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का संचालन शांतिलाल मीणा ने किया। प्रशिक्षण वर्ग में सभी प्रवासी कार्यकर्ता एवं प्रशिक्षार्थी आचार्य उपस्थित रहे। सत्र के दौरान इतिहास, संस्कृति और शिक्षक धर्म से जुड़े विचारों ने उपस्थित प्रतिभागियों को नई प्रेरणा और दिशा प्रदान की।

Pratahkal Bureau
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