उदयपुर में राजस्थान कृषि महाविद्यालय में मनाया गया वीर बाल दिवस, साहिबजादों की शहादत को याद किया गया
उदयपुर के राजस्थान कृषि महाविद्यालय में वीर बाल दिवस का आयोजन किया गया, जिसमें डीन प्रो. मनोज कुमार महला और डॉ. हरि सिंह मीणा ने साहिबजादों की शहादत और वीरता पर विस्तृत जानकारी साझा की। कार्यक्रम ने इतिहास और बलिदान की महत्ता को विद्यार्थियों व श्रोताओं के सामने उजागर किया।

उदयपुर। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के राजस्थान कृषि महाविद्यालय में वीर बाल दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डीन प्रो. मनोज कुमार महला ने की, जिन्होंने बच्चों और उपस्थित श्रोताओं को बाल दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला और इसे देशभक्ति और साहस के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में डॉ. हरि सिंह मीणा ने वीर बाल दिवस के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि हर साल 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन सिख धर्म के 10वें गुरु, गुरु गोविंद सिंह के चारों पुत्रों ने धर्म और देश की रक्षा के लिए अद्भुत शहादत दी थी। विशेष रूप से गुरु गोविंद सिंह के सबसे छोटे पुत्र, 9 वर्षीय बाबा जोरावर सिंह और 7 वर्षीय बाबा फतह सिंह की शहादत को याद किया जाता है।
डॉ. मीणा ने विस्तार से बताया कि मुगल शासक औरंगजेब के आदेश पर सरहिंद के नवाब वजीर खान ने दोनों छोटे साहिबजादों को धर्म परिवर्तन करने और इस्लाम स्वीकार करने के लिए दबाव डाला। लेकिन माता गुजरी और गुरु गोबिंद सिंह द्वारा दिए गए संस्कारों और मूल्यवान शिक्षा ने साहिबजादों को अपने धर्म से कभी विचलित नहीं होने दिया। उन्होंने अत्याचार और अमानवीय यातनाओं का सामना करते हुए भी अपने धर्म की रक्षा की और जिंदा दीवार में चुनवा दिए गए।
कार्यक्रम में उपस्थित श्रोताओं ने साहस और आत्मबल की इस अद्वितीय कथा को सुनकर भावविभोर होकर श्रद्धांजलि अर्पित की। डीन प्रो. मनोज कुमार महला और डॉ. हरि सिंह मीणा ने इस अवसर पर उपस्थित सभी विद्यार्थियों और अतिथियों को वीर बाल दिवस की ऐतिहासिक महत्ता समझाते हुए कहा कि यह दिन न केवल सिख धर्म बल्कि पूरे देशवासियों के लिए साहस और बलिदान का प्रतीक है।
इस आयोजन ने उपस्थित सभी को इतिहास की अमिट कहानियों से रूबरू कराते हुए वीर साहिबजादों की शहादत को याद करने और उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने का अवसर प्रदान किया। उदयपुर में आयोजित यह कार्यक्रम समाज और शिक्षा जगत में वीर बाल दिवस की महत्ता को नए दृष्टिकोण से स्थापित करता है।
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Pratahkal Bureau
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