आज दिनांक 13 फरवरी 2026 को विराट हिंदू सम्मेलन पुरिया खेड़ी मंडल वल्लभनगर का आयोजित हुआ। कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों के भोपाजी और पुजारियों का सम्मान किया गया। भारत माता पूजन से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ एवं भारत माता की आरती और भोजन मंत्र के बाद भोजन प्रारंभ किया गया। सभी लोगों ने बैठ के भोजन का आनंद लिया और भोजन प्रसादी के बाद में कार्यक्रम पूर्ण हुआ।

मुख्य अतिथि एवं वक्ता कार्यक्रम में निम्नलिखित महानुभावों की गरिमामयी उपस्थिति रही: साध्वी सुगन ज्योति जी (सालोर) अनूप जी महाराज (रामकाज आश्रम, घणोली) खोडिया जी बावजी के भोपाजी भग्गा जी मुख्य वक्ता: श्री हरि शंकर जी भाई साहब (विभाग प्रचारक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) भव्य शोभा यात्रा और त्रिवेणी संगम पुरिया खेड़ी, बालाथल, विजयपुरा, बडलिया, वाजमियां, गोटीपा, रेबारियों की ढाणी और मुंडोल आदि वास स्थान से हजारों स्त्री पुरुष शोभा यात्रा के रूप में एकत्र हुए। शोभा यात्रा के साथ डीजे, झांकियां, ऊंट गाड़ियां और घोड़े आदिकाल आवाज में साथ चल रहे थे। पुरिया खेड़ी से चलकर पश्चिम दिशा की ओर, गोटीपा से उत्तर दिशा की ओर एवं वाजमियां से पूर्व दिशा की ओर रेलिया चलती हुई मुंडोल खोडियाजी बावजी के स्थान पर त्रिवेणी संगम के रूप में आकर शोभा यात्रा धर्म सभा में परिवर्तित हुई।
लोगों के अनुसार कोई 5000 से अधिक लोगों का वहां जमावड़ा रहा ऐसा कार्यक्रम हर वर्ष हो अंत में ऐसा संकल्प दोहराया गया।
संतों एवं वक्ताओं का ओजस्वी उद्बोधन घनोली गौशाला रामकाज आश्रम के अनुप दास जी ने इकट्ठे रहने, गौ-भक्ति तथा संस्कार एवं शिक्षा पर अपने विचार व्यक्त किए। साध्वी सुगन ज्योति सालोर ने मातृ शक्ति को लक्ष्य करते हुए प्रभावी ढंग से विषय रखा: "केवल शिक्षा नहीं संस्कार भी महत्वपूर्ण है और संस्कार की प्राथमिक शिक्षा माता के सिवा और कोई नहीं दे सकता है, माता धाम की धुरी प्रथम शिक्षक है।" उन्होंने संकल्प दिलाया कि बच्चा तिलक लगाकर विद्यालय जाए, माता-पिता के चरण स्पर्श करे और घर में शास्त्र-शस्त्र दोनों रखे। उन्होंने बहनों से आग्रह किया कि कम से कम चार पुत्र को जन्म दें- एक संघ कार्य के लिए, एक फौज के लिए, एक शिक्षक और चौथा अपनी परंपरा को चलाने के लिए। उन्होंने कहा कि
राम, कृष्ण, शिवाजी और प्रताप माता की कोख में और गोद में ही बनते हैं।
मुख्य वक्ता श्री हरि शंकर जी ने राष्ट्र प्रथम और भारत भक्ति पर जोर देते हुए कहा: "हजारों सालों की गुलामी और संघर्ष के काल से निकलकर माताओं के और इन भोपाओं के धार्मिक संस्कारों के बल पर भारत आज भारत रह पाया है।" उन्होंने संघ साधना के 100 वर्षों और सम्मेलनों के महत्व को बताया। अंत में 'नीला घोड़ा का असवार' गीत बोलकर प्रताप के जीवन वृत और उनके साथियों को याद करते हुए अपने विषय को पूर्ण किया। प्रेरणादायी प्रदर्शनी और संस्कार मंदिर परिसर में समाज को प्रेरणा देने हेतु अनेक महापुरुषों के विराट कट आउट लगाए गए थे: माता अहिल्याबाई होल्कर, रानी ऐबका, भीमराव अंबेडकर। चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, श्री गुरु जी, डॉक्टर केशव राव बलिराम हेडगेवार। स्वामी विवेकानंद, गोविंद गुरु, संत रविदास। साध्वी जी ने छोटे-छोटे संकल्पों के माध्यम से पर्यावरण, सामाजिक समरसता, नागरिक शिष्टाचार और स्वबोध (भाषा, भूषा, भवन, भोजन) पर अपनी गहन पकड़ दिखाई और अंत में भजन गायन कर सबको भाव विभोर कर दिया।
Pratahkal Newsroom

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