खेरवाड़ा। वैज्ञानिक एवं जैविक खेती की आधुनिक तकनीकों को अपनाकर ग्राम मीठी महुड़ी, सुंदरा के निवासी किसान दंपती मंजुला देवी एवं मुकेश भगोरा ने खेती को न केवल लाभकारी बनाया है, बल्कि अपनी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज कर क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभरे हैं। सीएमएफ संस्था के सहयोग से संचालित इस परिवर्तनकारी यात्रा ने इस दंपती की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

पूर्व में मंजुला देवी एवं मुकेश भगोरा पारंपरिक खेती के ढर्रे पर निर्भर थे, जिसमें रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग के कारण खेती की लागत लगातार बढ़ रही थी, जबकि लाभ का अनुपात सीमित था। इसके अतिरिक्त, मौसम की अनिश्चितता और बाजार में फसलों का उचित मूल्य न मिल पाने के कारण परिवार की आय में स्थिरता का अभाव था। हालांकि, सीएमएफ संस्था द्वारा आयोजित गहन प्रशिक्षण और प्राप्त नियमित तकनीकी मार्गदर्शन ने उनकी सोच और कार्यशैली में आमूलचूल परिवर्तन किया।

दंपती ने वैज्ञानिक एवं जैविक खेती की आधुनिक विधियों को आत्मसात करते हुए खेत की वैज्ञानिक तैयारी, उन्नत किस्म के बीजों का चयन एवं समय पर बुवाई को प्राथमिकता दी। उन्होंने गोबर की सड़ी हुई खाद, जीवामृत, घनजीवामृत, मल्चिंग, संतुलित सिंचाई एवं नीम आधारित जैविक कीट एवं रोग प्रबंधन जैसी तकनीकों का नियमित उपयोग सुनिश्चित किया। इन प्रयासों के फलस्वरूप न केवल मिट्टी की उर्वरता में सुधार हुआ, बल्कि पौधों का विकास बेहतर होकर फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

फसल विविधीकरण का सफल उदाहरण प्रस्तुत करते हुए उन्होंने अपने खेत में भिंडी, ग्वार, लौकी, खीरा एवं बैंगन की मिश्रित खेती की। इस रणनीति के कारण उन्हें पूरे सीजन में अलग-अलग समय पर सब्जियों की तुड़ाई का अवसर प्राप्त हुआ और परिवार प्रतिदिन ताज़ी सब्जियां स्थानीय हाट-बाजारों एवं व्यापारियों तक पहुँचा रहा है। वर्तमान में मौसम एवं उत्पादन की उपलब्धता के अनुसार उन्हें प्रतिदिन लगभग 800 से 1,200 रुपये तक की आय प्राप्त हो रही है, जिसका उपयोग बच्चों की शिक्षा, घरेलू आवश्यकताओं एवं कृषि कार्यों में पुनर्निवेश के रूप में किया जा रहा है।

रासायनिक लागत में कमी आने से खेती का व्यवसाय अब अधिक लाभदायक हो गया है। इसके साथ ही, जैविक उत्पाद होने के कारण उनकी सब्जियों को बाजार में विशेष मांग और उचित मूल्य मिल रहा है। मंजुला देवी एवं मुकेश भगोरा की यह सफलता प्रमाणित करती है कि वैज्ञानिक एवं जैविक खेती के साथ तकनीकी मार्गदर्शन और फसल विविधीकरण को अपनाकर किसान न्यूनतम लागत में अधिकतम उत्पादन प्राप्त कर अपनी आर्थिक स्थिति में क्रांतिकारी सुधार ला सकते हैं।

Dinesh Kumar Jain, Kherwara(Udaipur)

Dinesh Kumar Jain, Kherwara(Udaipur)

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