मेवाड़ अंचल के खेरोदा कस्बे सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों बिजली विभाग की कार्यप्रणाली ग्रामीणों के लिए जी का जंजाल बन गई है। पिछले कुछ समय से जारी अघोषित बिजली कटौती और बार-बार होने वाली 'आंख मिचौली' ने न केवल जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है, बल्कि विकास की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा दिया है। विभाग द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के घंटों तक बिजली गुल कर दी जाती है, जिससे समूचा क्षेत्र अंधेरे और अव्यवस्था के साये में जीने को मजबूर है।

कड़ाके की ठंड और शीतलहर के इस दौर में बिजली की किल्लत ने ग्रामीणों की दुश्वारियों को दोगुना कर दिया है। सुबह के समय जब तापमान न्यूनतम स्तर पर होता है, तब बिजली न होने से दैनिक दिनचर्या पूरी तरह ठप हो जाती है। विशेषकर स्नान और अन्य घरेलू कार्यों के लिए गर्म पानी की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बन गई है। घरों में रखे हीटर और गीजर जैसे आधुनिक उपकरण महज शोपीस बनकर रह गए हैं, जिससे बुजुर्गों और बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

खेती-किसानी प्रधान इस क्षेत्र में बिजली की अनिश्चितता ने रबी की फसलों की सिंचाई और अन्य कृषि कार्यों को भी प्रभावित किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली आने और जाने का कोई निश्चित समय तय नहीं है, जिसके कारण वे न तो अपने कृषि कार्य समय पर पूरे कर पा रहे हैं और न ही घरेलू उत्तरदायित्व। बार-बार की जा रही शिकायतों के बावजूद प्रशासन और विद्युत विभाग के आला अधिकारी इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान देने की जहमत नहीं उठा रहे हैं।

स्थानीय निवासियों में विभाग की इस हठधर्मिता के खिलाफ गहरा रोष व्याप्त है। आक्रोशित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बिजली आपूर्ति सुचारू नहीं की गई और अघोषित कटौती पर लगाम नहीं कसी गई, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होंगे। वर्तमान स्थिति ने न केवल प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि आमजन के सब्र का बांध भी तोड़ दिया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस जन-समस्या का समाधान कब तक निकाल पाता है या फिर ग्रामीणों का यह आक्रोश किसी बड़े संघर्ष का रूप लेगा।

Pratahkal Bureau

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