यूजीसी विनियम 2026: विप्र फाउंडेशन ने राष्ट्रपति और पीएम के नाम सौंपा ज्ञापन
वल्लभनगर में विप्र फाउंडेशन ने यूजीसी विनियम 2026 को उच्च शिक्षा की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।

उदयपुर के वल्लभनगर में यूजीसी विनियम 2026 के विरोध में प्रदर्शन के बाद उपखण्ड अधिकारी किरण पाल को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते विप्र फाउंडेशन के सदस्य।
उदयपुर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) विनियम 2026 के सम्बन्ध में पुनर्विचार करने को लेकर विप्र फाउंडेशन वल्लभनगर द्वारा प्रदर्शन कर नारेबाजी करते हुए राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के नाम उपखण्ड अधिकारी किरण पाल को ज्ञापन सौंपा गया।
विनियम के प्रतिकूल प्रभावों पर चिंता
ज्ञापन में बताया गया कि "विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता संवर्द्धन) विनियम 2026 लागू होने के साथ मीडिया, सोशल मीडिया एवं समाज में भी अनिर्णय व अविश्वास के वातावरण का आभास हो रहा है।" निश्चित ही यह विनियम सामाजिक समरसता, समान अवसर, भेदभाव रहित वातावरण के उद्देश्य से लागू करने की मंशा रही होगी।
दुरुपयोग और फर्जी शिकायतों की आशंका
- प्रताड़ना का डर: इस विनियम के बाद इसका दुरूपयोग होने व फर्जी शिकायतों से निरपराध व्यक्ति के प्रताडित होने की आशंका बढी है।
- पूर्व अनुभव: विधि व पदों के दुरूपयोग तथा फर्जी शिकायतों की संख्या से भी पहले ही हम अवगत है। ऐसी स्थिति में इस विनियम के सभी पक्षों पर एक बार पुनर्विचार करने की आवश्यकता है।
- सतर्कता की मांग: इस विनियम की आड़ लेकर सामाजिक सौहार्द्र पर आघात करने वाले लोगों के मंसूबे किसी भी प्रकार पूरे न हो, इस विषय में सतर्कता आवश्यक है।
स्वायत्तता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रहार
यह बिल उच्च शिक्षा की स्वायता, लोकतांत्रिक मुल्यों तथा संवेधानिक भावना के विपरित प्रतीत होता है। यूजीसी बिल के माध्यम से विश्व विद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थाओं पर अत्यधिक केन्द्रियकरण एवं सरकारी नियंत्रण किया जा रहा है, जिससे शेक्षणिक स्वतंत्रता प्रभावित होगी। यह बिल राज्य सरकार के अधिकारों का भी हनन करता है।
विप्र फाउंडेशन की मुख्य मांगें
विप्र फाउंडेशन ने ज्ञापन के माध्यम से प्रधानमंत्री से निम्नलिखित मांगें की हैं:
- यूजीसी विनियम 2026 को तत्काल वापस लिया जाए।
- शिक्षाविदों, विद्यार्थियों, अधिवक्ताओं एवं राज्य सरकारों सहित सभी हितधारकों से व्यापक परामर्श के बाद ही कोई नया विधेयक लाया जाए।
- उच्च शिक्षा की स्वायत्तता, गुणवत्ता एवं लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।
प्रदर्शन में सम्मिलित सदस्य और पदाधिकारी
ज्ञापन देने के दौरान विप्र फाउंडेशन के कई युवा एवं वरिष्ठजन मौजूद रहे, जिनमें प्रमुख नाम निम्नलिखित हैं:
- देहात जिला महासचिव प्रेमशंकर रामावत, जिला संरक्षक मोतीलाल भट्ट।
- जिला अध्यक्ष कर्मचारी प्रकोष्ठ गोपीलाल मेनारिया, जिला उपाध्यक्ष मोहनलाल मेनारिया, भंवर भट्ट।
- तहसील महासचिव डालचन्द नागदा, तहसील उपाध्यक्ष लक्ष्मीलाल मेघावत, बद्रीलाल मेघावत।
- कोषाध्यक्ष छगन मेनारिया, संरक्षक महेश जोशी, भंवरलाल आमेटा।
- नगर अध्यक्ष राजकुमार उपाध्याय, युवा तहसील अध्यक्ष मयुर जोशी, तहसील महासचिव मोहनलाल मेनारिया।
- फतेहलाल आमेटा, मिडिया प्रभारी सुरेश मेनारिया, विपिन आमेटा, वासुदेव दवे, दुर्गेश रागोत।
- दुर्गाशंकर दवे, ऊंकार लाल मेनारिया, तुलसीराम मेनारिया, भगवती लाल, दिनेश मेनारिया।
- कन्हैयालाल चौबीसा, दिपक आमेटा, वीरेंद्र जोशी, तहसील सयुंक्त सचिव सुरज जोशी।
- दिलिप मेनारिया, धर्मेंद्र उपाध्याय, जगदीश भट्ट, गणपत मेनारिया।

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