उदयपुर के शिल्पग्राम उत्सव-2025 में सफलता का महासंग्राम: रिकॉर्ड तोड़ बिक्री ने रचा नया इतिहास
उदयपुर के शिल्पग्राम उत्सव-2025 ने सफलता के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। निदेशक फुरकान खान के नेतृत्व में इस 10 दिवसीय मेले में 1 लाख 88 हजार से अधिक टिकटों की बिक्री हुई और 635 लाख का क्राफ्ट व्यापार हुआ। जानिए कैसे 2013 के 93,000 टिकटों से शुरू हुआ यह सफर आज एक ऐतिहासिक कीर्तिमान में तब्दील हो गया और शिल्पग्राम ने कला जगत में नई ऊंचाइयां छुईं।

उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर की कलात्मक विरासत और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक 'शिल्पग्राम उत्सव-2025' इस वर्ष सफलता की नई इबारत लिखकर संपन्न हुआ। कला, संस्कृति और हस्तशिल्प के इस महाकुंभ ने न केवल जन-भागीदारी के पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त किए, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी एक अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किया है। दस दिनों तक चले इस रंगारंग उत्सव में जनसैलाब इस कदर उमड़ा कि टिकटों की बिक्री का आंकड़ा 1 लाख 88 हजार के पार निकल गया, जिसने आयोजन की वैश्विक लोकप्रियता पर मुहर लगा दी है।
31 दिसंबर को संपन्न हुए इस 10 दिवसीय उत्सव की उपलब्धियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत करते हुए पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर के निदेशक फुरकान खान ने गुरुवार को आधिकारिक विवरण साझा किया। उन्होंने बताया कि इस वर्ष हस्तशिल्पियों के हुनर को भी जबरदस्त सराहना मिली, जिसके फलस्वरूप 635 लाख रुपये से अधिक की क्राफ्ट बिक्री दर्ज की गई। यह आंकड़ा शिल्पकारों के आर्थिक सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक बड़ी छलांग माना जा रहा है।
निदेशक फुरकान खान ने इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे के संघर्ष और संकल्प की यात्रा को साझा करते हुए बताया कि जब उन्होंने 2014 में पहली बार निदेशक का पदभार संभाला था, तब उनके सामने 2013 के आंकड़े थे, जिसमें लगभग 93,000 टिकटों की बिक्री हुई थी। उसी समय उन्होंने इस संख्या को दोगुना करने का एक महत्वाकांक्षी संकल्प लिया था। उनके नेतृत्व में पहले ही वर्ष यानी 2014 में 30 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि के साथ टिकटों की संख्या 1,25,000 के पार पहुंच गई थी। विकास का यह सिलसिला निरंतर जारी रहा और वर्ष 2018 तक यह आंकड़ा 1,48,000 तक पहुंच गया, लेकिन लक्ष्य अब भी अधूरा था।
वर्ष 2024 और 2025 में मिले पुनः अवसरों ने इस संकल्प को पूर्णता प्रदान की। शिल्पग्राम उत्सव-2025 में टिकट बिक्री का कुल आंकड़ा 1,88,735 तक जा पहुंचा, जिसने एक दशक पुराने सपने को हकीकत में बदल दिया। यह उपलब्धि न केवल पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के प्रबंधन कौशल को दर्शाती है, बल्कि यह भी सिद्ध करती है कि उदयपुर का शिल्पग्राम आज देश के सबसे पसंदीदा सांस्कृतिक केंद्रों में शुमार हो चुका है। इस उत्सव की गूँज ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिकता के दौर में भी लोक कला और शिल्प के प्रति आम जन का आकर्षण कम नहीं हुआ है, बल्कि इसमें निरंतर वृद्धि हो रही है।

Pratahkal Bureau
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