उदयपुर की नई पहल: 'स्माइल उदयपुर' अभियान से अब बाल भिक्षावृत्ति और बाल श्रम पर लगेगा अंकुश
उदयपुर जिला प्रशासन और पुलिस ने बाल भिक्षावृत्ति व बाल श्रम को जड़ से मिटाने के लिए 'स्माइल उदयपुर' अभियान शुरू किया है। जिला कलेक्टर नमित मेहता के निर्देशन में पुलिस महानिरीक्षक गौरव श्रीवास्तव ने रेस्क्यू वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। अभय कमांड कैमरों और जियो-टैगिंग के माध्यम से बच्चों को रेस्क्यू कर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा।

उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर को बाल भिक्षावृत्ति और बाल श्रम जैसी सामाजिक कुरीतियों से पूरी तरह मुक्त करने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने एक अभूतपूर्व और कड़े संकल्प के साथ 'स्माइल उदयपुर' अभियान का शंखनाद किया है। पर्यटन नगरी की छवि को और अधिक मानवीय और सुरक्षित बनाने की दिशा में राज्य का यह अपनी तरह का पहला नवाचारपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी अभियान का औपचारिक शुभारंभ गुरुवार को कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित एक गरिमामय समारोह में बाल भिक्षावृत्ति एवं बाल श्रम के विरुद्ध सामूहिक शपथ और हस्ताक्षर अभियान के साथ हुआ। जिला कलेक्टर नमित मेहता के कुशल निर्देशन में तैयार किए गए इस अभियान के तहत पुलिस महानिरीक्षक गौरव श्रीवास्तव और अतिरिक्त जिला कलेक्टर (नगर) जितेन्द्र ओझा ने बाल श्रम एवं भिक्षावृत्ति रेस्क्यू वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जो शहर के विभिन्न कोनों में जाकर संकटग्रस्त बच्चों को नया जीवन देने का कार्य करेगा।
इस अवसर पर राजस्थान राज्य बाल संरक्षण आयोग के सदस्य ध्रुव कुमार कविया, बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष यशोदा पणिया और श्रम आयुक्त संकेत मोदी की उपस्थिति ने इस अभियान की गंभीरता को और स्पष्ट किया। कार्यक्रम में पुलिस उपाधीक्षक छगन पुरोहित, मानव तस्करी निरोधक इकाई की प्रभारी दीपिका राठौड़ और यूनिसेफ प्रभारी सिंधु बिनुजीत सहित कई प्रशासनिक अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे, जिन्होंने इस साझा प्रयास को सफल बनाने की प्रतिबद्धता जताई।
अभियान के नोडल अधिकारी और बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक के.के. चन्द्रवंशी ने रणनीतिक ढांचे पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 'स्माइल उदयपुर' को तीन सुव्यवस्थित चरणों में क्रियान्वित किया जाएगा। प्रथम चरण, जो 1 से 31 जनवरी तक चलेगा, पूरी तरह से रेस्क्यू ऑपरेशन पर केंद्रित रहेगा, जिसमें शहर के विभिन्न क्षेत्रों से बच्चों को मुक्त कराया जाएगा। इसके पश्चात, 2 फरवरी से 31 मार्च तक चलने वाले द्वितीय चरण में इन बच्चों के पुनर्वास, शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के लिए काउंसलिंग पर जोर दिया जाएगा, ताकि वे दोबारा अपराध और शोषण के इस दलदल में न गिरें। अभियान के अंतिम और तृतीय चरण में प्रशासन उन पर्यटन स्थलों और सार्वजनिक क्षेत्रों को 'भिक्षावृत्ति मुक्त क्षेत्र' घोषित करेगा, जहाँ नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
तकनीकी रूप से इस अभियान को अभय कमांड सेंटर के सीसीटीवी कैमरों से जोड़ा गया है, जो प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर पल-पल की निगरानी रखेंगे। रेस्क्यू के दौरान बच्चों की जियो-टैगिंग की जाएगी, जिससे उनके भविष्य की निगरानी और फॉलोअप को अधिक सटीक बनाया जा सके। किसी भी स्थान पर शोषण की सूचना मिलने पर चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और अभियान समन्वयक की टीम तत्काल हरकत में आएगी। इस अभियान में 'भिक्षा नहीं, शिक्षा दें' के मूल मंत्र के साथ व्यापक जन-जागरूकता भी फैलाई जाएगी, जिसके तहत दुकानों और प्रतिष्ठानों पर विशेष स्टिकर लगाए जाएंगे। पुलिस, श्रम, और बाल अधिकारिता विभागों के साथ-साथ गायत्री सेवा संस्थान और बाल सुरक्षा नेटवर्क जैसे संगठनों का यह समेकित प्रयास उदयपुर को बच्चों के लिए एक सुरक्षित स्वर्ग बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

Pratahkal Bureau
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