उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर के डबोक क्षेत्र स्थित घणोली तिराहा इन दिनों विकास और सुरक्षा के बीच एक बड़ी जंग का मैदान बन चुका है। महाराणा प्रताप हवाई अड्डे के समीप स्थित इस व्यस्त मार्ग पर अपनी जान हथेली पर रखकर सड़क पार करने को मजबूर हजारों ग्रामीणों और यात्रियों के सब्र का बांध अब टूट गया है। पिछले कई वर्षों से रोंग साइड की घातक यात्रा झेल रहे आमजन की आवाज को लेकर पूर्व पंचायत समिति सदस्य किशनलाल मेघवाल करणपुर ने स्थाई लोक अदालत का दरवाजा खटखटाया है। इस गंभीर जनहित के मुद्दे पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग एवं परिवहन मंत्रालय के सचिव, एनएचएआई के अध्यक्ष और परियोजना अधिकारी (खंड मंगलवाड़ से देबारी राष्ट्रीय राजमार्ग 48) सहित अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

इस विवाद की जड़ें साल 2018 में हुए हाइवे के चौड़ीकरण से जुड़ी हैं। जब इस मार्ग को फोरलेन से सिक्सलेन में उन्नत किया गया, तभी से स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों द्वारा यहां अंडरपास या ब्रिज निर्माण की मांग निरंतर की जा रही थी। विडंबना यह है कि वर्तमान में यहां कोई उचित व्यवस्था न होने के कारण घणोली तिराहे से आने वाले वाहनों को उदयपुर की ओर करीब 800 मीटर तक रोंग साइड (गलत दिशा) में चलना पड़ता है। यह मजबूरी न केवल यातायात नियमों का उल्लंघन है, बल्कि प्रतिदिन हजारों जिंदगियों को मौत के साये में धकेल रही है। पुलिस विभाग के डराने वाले आंकड़े बताते हैं कि पिछले 5 वर्षों में इस स्थान पर 22 भीषण दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें 7 लोगों की असामयिक मृत्यु हो चुकी है और 17 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। इन आंकड़ों ने घणोली तिराहे को आधिकारिक रूप से 'ब्लैक स्पॉट' की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया है।

आरटीआई कार्यकर्ता किशनलाल मेघवाल ने अदालत को बताया कि इस समस्या को लेकर पूर्व में तत्कालीन सांसद ने लोकसभा में भी आवाज बुलंद की थी। इतना ही नहीं, स्वयं केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राष्ट्रीय राजमार्ग के लोकार्पण समारोह के दौरान यहां अंडरपास बनाने की सार्वजनिक घोषणा की थी, लेकिन धरातल पर आज तक ईंट भी नहीं लगी। लोक परिवहन के आंकड़ों के अनुसार, इस मार्ग पर 838 यात्रियों का आधिकारिक परमिट जारी है, जबकि निजी वाहनों और राजस्व गांव घणोली के निवासियों को मिलाकर प्रतिदिन लगभग 5 हजार लोग इस खतरनाक पॉइंट से गुजरते हैं।

प्रशासनिक उदासीनता और हाइवे अधिकारियों की हठधर्मिता के खिलाफ अब कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। हाल ही में राजस्थान पत्रिका के 'सांसद के नाम चिट्ठी' अभियान के माध्यम से भी वर्तमान सांसद मन्नालाल रावत को लोकसभा में यह प्रश्न उठाने के लिए पत्र भेजा गया है। अब सभी की निगाहें 14 जनवरी को होने वाली स्थाई लोक अदालत की सुनवाई पर टिकी हैं। यह केवल एक सड़क निर्माण का मुद्दा नहीं है, बल्कि उन हजारों परिवारों की सुरक्षा का सवाल है जो रोज अपने घर से इस उम्मीद में निकलते हैं कि रोंग साइड के इस खूनी सफर से उन्हें जल्द निजात मिलेगी।

Hemant Ameta, Udaipur

Hemant Ameta, Udaipur

हेमंत अमेटा उदयपुर से प्रात:काल के लिए समाचार कवर करने वाले अनुभवी रिपोर्टर हैं। वे स्थानीय, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की खबरों को सटीक और निष्पक्ष दृष्टिकोण से पाठकों तक पहुँचाने के लिए समर्पित हैं। हेमंत अपने तेज़ रिफ्लेक्स और खबरों की गहन जांच के लिए जाने जाते हैं, जिससे पाठकों को हर अपडेट समय पर और भरोसेमंद जानकारी के साथ मिलती है।

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