उदयपुर: दृष्टिबाधित शिक्षक भावेश देसाई ने अनुसूचित क्षेत्र में हासिल की 97वीं रैंक
समिधा संस्थान के मार्गदर्शन में शिक्षक भावेश देसाई ने दिव्यांग श्रेणी में प्रदेश में दूसरा स्थान पाकर मिसाल पेश की, बिना सरकारी मदद के संचालित है संस्थान।

लेक सिटी उदयपुर से एक अत्यंत प्रेरणादायक समाचार सामने आया है, जहाँ दृष्टिबाधित शिक्षक भावेश देसाई ने अपनी दिव्यांगता को मात देते हुए सफलता का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। समिधा संस्थान के अध्यक्ष डॉ. चंद्रगुप्त सिंह चौहान के अनुसार, संस्थान द्वारा संचालित 'समिधा दृष्टि दिव्यांग मिशन' (सेक्टर 14) से जुड़े प्रतिभाशाली भावेश देसाई ने यह गौरवशाली उपलब्धि हासिल की है। वर्तमान में तृतीय श्रेणी अध्यापक के पद पर कार्यरत भावेश ने अपने कठिन परिश्रम और अटूट संकल्प के बल पर अनुसूचित क्षेत्र से सामान्य वर्ग में 97वीं रैंक तथा दृष्टि दिव्यांग श्रेणी में पूरे प्रदेश में दूसरी रैंक प्राप्त कर संस्थान, उदयपुर शहर और समस्त समाज का मान बढ़ाया है।
सफलता की इस आधिकारिक सूचना के प्राप्त होते ही दृष्टिबाधित छात्रावास में उत्साह और हर्षोल्लास का वातावरण व्याप्त हो गया। भावेश के साथियों, गुरुजनों और शुभचिंतकों ने दूरभाष के माध्यम से उन्हें बधाइयाँ प्रेषित कीं, वहीं उनके परिवार में भी खुशी की लहर दौड़ गई। उल्लेखनीय है कि इस छात्रावास से पूर्व में भी कई विद्यार्थी प्रशासनिक एवं अन्य उच्च पदों पर चयनित होकर अपनी बौद्धिक क्षमता का लोहा मनवा चुके हैं। यह संस्थान निरंतर दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सटीक मार्गदर्शन प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रहा है।
इस सफलता के पीछे एक विशेष तथ्य यह है कि यह छात्रावास बिना किसी सरकारी आर्थिक सहायता के, पूर्णतः वॉलंटियरों और जनसहयोग के माध्यम से संचालित हो रहा है। यहाँ अध्ययनरत सभी विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा, आवास, भोजन तथा अन्य मूलभूत सुविधाएँ सुलभ कराई जा रही हैं। संस्थान ने नगर निगम द्वारा आवंटित एक पुराने सामुदायिक भवन को, जो कभी खंडहर की स्थिति में था, स्वयं के प्रयासों से मरम्मत कराकर एक सुव्यवस्थित और सुरक्षित छात्रावास में परिवर्तित किया है। आज यही भवन दृष्टिबाधित बच्चों के लिए एक प्रेरणादायक केंद्र बना हुआ है।
हालाँकि, एक प्रशासनिक चुनौती यह भी है कि संस्थान द्वारा इस छात्रावास के सुचारू संचालन हेतु संबंधित विभाग को बार-बार पत्राचार किए जाने के उपरांत भी अब तक कोई आधिकारिक प्रशासनिक स्वीकृति जारी नहीं की गई है। इस बाधा के बावजूद, संस्थान बिना रुके अपनी सेवाएँ निरंतर दे रहा है। वर्तमान में यह छात्रावास उदयपुर संभाग में दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए एकमात्र संबल और सहारा बनकर उभरा है। भावेश देसाई की यह ऐतिहासिक उपलब्धि न केवल उनकी व्यक्तिगत जीत है, बल्कि संपूर्ण दृष्टिबाधित समाज के लिए एक सशक्त प्रेरणा पुंज है। समिधा संस्थान ने भावेश के उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना करते हुए यह विश्वास व्यक्त किया है कि उनका यह संघर्ष और सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगी।

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