उदयपुर: विद्या प्रचारिणी सभा विवाद में प्रशासन के आश्वासन के बाद आंदोलन स्थगित
आईजी और कलेक्टर के साथ 3 घंटे चली बैठक, भूपाल नोबल्स संस्थान में तालाबंदी और ऑडिट को लेकर दो दिन में समाधान का भरोसा।

उदयपुर। भूपाल नोबल्स विद्या प्रचारिणी सभा पर कब्जे को लेकर गहराया विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। मेवाड़ क्षत्रिय महासभा संस्थान द्वारा अपनी मांगों के समर्थन में २८ अप्रैल को प्रस्तावित उग्र आंदोलन को प्रशासन के दो दिवसीय ठोस आश्वासन के बाद फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। सोमवार को जिला प्रशासन और संस्थान के पदाधिकारियों के बीच करीब तीन घंटे तक चली मैराथन बैठक के बाद यह सहमति बनी, जिसमें आईजी और कलेक्टर सहित आला अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर स्थिति को संभालने का प्रयास किया।
संस्थान अध्यक्ष बालूसिंह कानावत ने जानकारी दी कि आईजी गौरव श्रीवास्तव के साथ हुई चर्चा में उन्होंने संस्थान की मांगों पर गंभीरता दिखाते हुए दो दिन के भीतर सकारात्मक समाधान निकालने का भरोसा दिलाया है। कलेक्ट्रेट में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में एसपी डॉ. अमृता दुहन, एडिशनल एसपी उमेश ओझा, जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल और एडीएम जितेंद्र ओझा मुख्य रूप से उपस्थित थे। प्रशासनिक अधिकारियों और संस्थान के पदाधिकारियों के मध्य हुई इस वार्ता में यह स्पष्ट किया गया कि यदि आगामी दो दिनों में इस जटिल विवाद का कोई तार्किक हल नहीं निकलता है, तो महासभा पुनः अपनी आगामी रणनीति तय कर आंदोलन की राह पकड़ने को स्वतंत्र होगी।
गौरतलब है कि विद्या प्रचारिणी सभा में छिड़ा यह वर्चस्व का संघर्ष अब अत्यधिक गंभीर रूप ले चुका है। वर्तमान कार्यकारिणी संस्थान का प्रभार छोड़ने को तैयार नहीं है और गतिरोध इस कदर बढ़ गया है कि कार्यकारिणी ने संस्थान के सभी कार्यालयों पर ताले जड़ दिए हैं। दूसरी ओर, संस्थान के प्रधान संरक्षक महेंद्र सिंह मेवाड़ द्वारा गठित एडहॉक कमेटी संस्थान की ऑडिट करवाने की मांग पर अडिग है। कार्यालयों की तालाबंदी और ऑडिट की जिद ने दोनों पक्षों के बीच टकराव की स्थिति को चरम पर पहुंचा दिया है। प्रशासन के लिए अब अगले ४८ घंटे इस विवाद को शांत करने और व्यवस्था बहाली के दृष्टिकोण से अत्यंत चुनौतीपूर्ण सिद्ध होने वाले हैं।

