उदयपुर। त्रिसुगंधि साहित्य, कला एवं संस्कृति संस्थान, उदयपुर की ओर से 9 अगस्त को श्रृंगी ऋषि भवन, अम्बामाता स्कीम में एक दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन एवं सम्मान समारोह, साहित्यिक परिचर्चा, पुस्तक विमोचन एवं पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रातः 9:30 बजे से रात्रि 8 बजे तक छह सत्रों में आयोजित कार्यक्रम में राजस्थान के 16 जिलों से आए करीब 150 साहित्यकार एवं साहित्यप्रेमी शामिल हुए। इस दौरान दिल्ली सहित अन्य स्थानों पर रह रहे प्रवासी राजस्थानियों का भी सम्मान किया गया। आयोजन में कुल 17 साहित्यकारों को सम्मानित किया गया और 8 पुस्तकों का विमोचन हुआ।

संस्थान की संस्थापक-अध्यक्ष आशा पाण्डेय ओझा ‘आशा’ एवं महासचिव संजय गुप्ता ‘देवेश’ ने बताया कि आयोजन का उद्देश्य साहित्यकारों को सम्मानित करने के साथ साहित्य की विभिन्न विधाओं, समकालीन विषयों एवं सामाजिक सरोकारों पर सार्थक संवाद को बढ़ावा देना है।

उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि धर्म नारायण जोशी, अध्यक्ष राधेश्याम सिखवाल, विशिष्ट अतिथि जितेन्द्र कुमार पाण्डेय, मुख्य निष्पादन अधिकारी, श्रीनाथजी मंदिर मंडल नाथद्वारा तथा वरिष्ठ साहित्यकार राजेन्द्र शर्मा ‘मुसाफिर’ सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे। इस अवसर पर डॉ. उमेश चौरसिया, अजमेर, विजय जोशी, कोटा, रतनलाल मेनारिया ‘नीर’, चित्तौड़गढ़, शकुंतला पालीवाल तथा डॉ. अंजीव अंजुम, दौसा को विभिन्न साहित्यिक सम्मानों से सम्मानित किया गया। वहीं स्व. ज्ञानेश्वरी चौहान के काव्य-संग्रह ‘जिजीविषा’ एवं रमेश भटनागर की पुस्तक ‘पपीहा मुँह खोलेगा तो...’ का विमोचन किया गया।

द्वितीय सत्र में ‘आदिवासी जनजातियाँ एवं राष्ट्रवाद’ विषय पर परिचर्चा हुई। मुख्य वक्ता डॉ. सुरेश सालवी तथा अध्यक्ष डॉ. आशीष सिसोदिया रहे। इस सत्र में नाथूसिंह इंदा, घनश्याम किनियां, ऋतु चतुर्वेदी एवं रश्मि शर्मा को विभिन्न साहित्यिक सम्मानों से सम्मानित किया गया। इस दौरान ‘बारिश में भीगे शब्द’ एवं ‘आशाओं के पंख’ पुस्तकों का विमोचन भी हुआ।

तृतीय सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं ‘बालवाटिका’ के संपादक डॉ. भैरूंलाल गर्ग ने की। उन्होंने राष्ट्रवाद, संस्कार, संस्कृति एवं बाल साहित्य पर विचार रखे। इस सत्र में श्याम मठपाल, चंद्रशेखर शर्मा एवं देवेन्द्र कुमार देव को सम्मानित किया गया। आशा पाण्डेय ओझा की पुस्तक ‘तितली चली सिनेमा हॉल’ एवं डॉ. नम्रता जैन की ‘काव्य सरिता’ का विमोचन हुआ। विभिन्न सत्रों में साहित्यकारों द्वारा पुस्तकों की समीक्षा एवं संचालन किया गया।

चतुर्थ सत्र में काव्य पाठ का आयोजन हुआ। इसमें बंसीलाल लोहार, लक्ष्मीलाल खटीक, सुदेश चौधरी, के.पी. राय, सुमन स्वामी, डॉ. नितिन मेनारिया, लोकेश चौबीसा, संगीता गुजराती, मधु सहगल, गति शर्मा, सोहन ढीढोर एवं चंद्रेश खत्री ने काव्य पाठ किया। इसके बाद संस्था के कार्यकर्ताओं एवं सहयोगी भामाशाहों का अभिनंदन किया गया। अंत में सुनीता निमिष सिंह एवं डॉ. मनीष सक्सेना ने आभार व्यक्त किया।

साहित्यिक परिचर्चा, काव्य पाठ, पुस्तक विमोचन, सम्मान समारोह एवं पुस्तक प्रदर्शनी के साथ आयोजित त्रिसुगंधि साहित्य संस्थान के राष्ट्रीय अधिवेशन में राजस्थान के 16 जिलों से आए करीब 150 साहित्यकार एवं साहित्यप्रेमी सहभागी बने। छह सत्रों में हुए आयोजन ने साहित्यकारों को विभिन्न साहित्यिक विधाओं, समकालीन विषयों एवं सामाजिक सरोकारों पर संवाद, समीक्षा और सृजन के लिए मंच प्रदान किया।

Pratahkal Newsroom

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