उदयपुर। भक्ति, शक्ति और सामाजिक एकजुटता का अद्भुत संगम आज वल्लभनगर उपखंड के दरोली गांव में देखने को मिला, जहाँ प्रजापति समाज की कुलदेवी श्रीयादे माता का जन्मोत्सव असीम श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। मेवलिया प्रजापति समाज पांच चौखला के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस भव्य समागम ने न केवल धार्मिक आस्था को प्रगाढ़ किया, बल्कि समाज की संगठित शक्ति का भी परिचय दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा देहात जिलाध्यक्ष पुष्कर तेली ने समाजजनों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि समाज के सर्वांगीण विकास के लिए सरकार और संगठन पूरी तरह तत्पर हैं और किसी भी स्तर पर संसाधनों या सहयोग की कमी नहीं आने दी जाएगी।

उत्सव का आगाज सोमवार को एक भव्य भजन संध्या के साथ हुआ, जहाँ विख्यात भजन गायक राजेश वैष्णव ने अपनी सुरीली प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। पूरी रात पांडाल माता के भजनों से गुंजायमान रहा और श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर नजर आए। मंगलवार सुबह जब मंदिर प्रांगण से विशाल शोभायात्रा रवाना हुई, तो दरोली की गलियां केसरिया रंग और जयकारों से सराबोर हो गईं। इस शोभायात्रा में हजारों की संख्या में समाजजनों ने भाग लिया, जिसमें युवाओं का जोश और महिलाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाएं और डीजे की धुनों पर थिरकते युवा इस उत्सव की भव्यता को चार चांद लगा रहे थे।

शोभायात्रा के समापन के पश्चात आयोजित मुख्य समारोह में पुष्कर तेली सहित अन्य अतिथियों ने समाज की 'डायरेक्ट्री' और 'कैलेंडर' का विमोचन किया। इस अवसर पर पुष्कर तेली ने समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि जब भी समाज ने उन्हें कोई जिम्मेदारी सौंपी है, उन्होंने उसे पूरी निष्ठा से निभाया है और भविष्य में भी मंदिर व सामाजिक विकास के लिए आर्थिक व रचनात्मक सहयोग निरंतर जारी रहेगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वागड़ मेवाड़ प्रजापति समाज संस्थान के संभागीय अध्यक्ष डूंगर लाल प्रजापति ने भी समाज की एकता पर बल दिया।

मेवाड़ चौखला अध्यक्ष गणेश लाल प्रजापत ने जानकारी दी कि इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने में पांचों चौखलों ने एकजुट होकर कार्य किया। कार्यक्रम के दौरान उन भामाशाहों का विशेष सम्मान किया गया जिन्होंने मंदिर विकास और डायरेक्ट्री निर्माण में अपना बहुमूल्य योगदान दिया है। सम्मानित होने वाले प्रमुख भामाशाहों में भंवरलाल प्रजापत (बिछड़ी), केशुलाल प्रजापत (माल की टूस) और उदय लाल प्रजापत (भटेवर) शामिल रहे।

इस गरिमामयी उपस्थिति के बीच विशिष्ट अतिथि के रूप में गणेश लाल प्रजापत घासा, मांगीलाल प्रजापत इटाली, केशवलाल जालोरा, सोहनलाल बेदला, भंवरलाल आयड, नारायणलाल तीतरड़ी, नारायणलाल पीपड़, किशनलाल देलवाड़ा, लक्ष्मीलाल ओडन, लालचंद बागोल, रूपलाल साकरोदा, देवीलाल सराय, उदयलाल महाराज की खेड़ी, प्रेमलाल माल कि टूस, रामलाल दरौली, मोहनलाल लकावली, हीरालाल कविता, दिनेश चंद्र बड़ी, दिनेश छोटा बेदला, रूपलाल सीसारमा, नानालाल मटून, फतेहलाल सविना, रामचंद्र लकड़वास, प्रभुलाल उमरडा, मोहन तीतरड़ी, किशनलाल कड़ियां, लक्ष्मीलाल देलवाड़ा, लोगरलाल मटाटा, आसाराम गोडच, भेरूलाल मोलेला, मांगीलाल नन्दोदा, गोटूलाल ओडन, वर्दीचंद मोलेला, नंदलाल धायला, लक्ष्मीलाल मोलेला और महामंत्री डीसी प्रजापत विठौली सहित हजारों समाजजन उपस्थित थे। यह जन्मोत्सव न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान था, बल्कि इसने मेवाड़ क्षेत्र में प्रजापति समाज की सांस्कृतिक विरासत और आपसी समन्वय की एक नई इबारत लिख दी है।

Pratahkal Newsroom

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