उदयपुर: 'हादसों के हाईवे' पर ट्रेलर का तांडव, प्रशिक्षु सीएचओ की दर्दनाक मौत से स्वास्थ्य विभाग में मातम
उदयपुर के बलीचा हाईवे पर ट्रेलर की टक्कर से प्रशिक्षु सीएचओ अर्जुन लाल मेघवाल की दर्दनाक मौत। घटना के बाद दीपेश कटारा गंभीर घायल। आक्रोशित सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने प्रशासन को सौंपा ज्ञापन, 50 लाख रुपये मुआवजे और सरकारी नौकरी की मांग की। लगातार तीसरे दिन हुए इस हादसे ने हाईवे सुरक्षा पर उठाए बड़े सवाल।

उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर का प्रतापनगर-बलीचा नेशनल हाईवे इन दिनों काल का पर्याय बन चुका है। मंगलवार को लगातार तीसरे दिन इस 'हादसों के हाईवे' ने एक और हंसते-खेलते परिवार का चिराग बुझा दिया। सवीना स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के बाहर हुए एक भीषण सड़क हादसे में मोटरसाइकिल सवार प्रशिक्षु सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) अर्जुन लाल मेघवाल की मौके पर ही रूह कंपा देने वाली मौत हो गई, जबकि उनका साथी गंभीर रूप से घायल हो गया। इस हृदयविदारक घटना के बाद समूचे चिकित्सा जगत में शोक की लहर दौड़ गई है और आक्रोशित सीएचओ साथियों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए भारी मुआवजे की मांग की है।
घटनाक्रम के अनुसार, सराड़ा निवासी 28 वर्षीय अर्जुन लाल मेघवाल, पुत्र शंकरलाल मेघवाल, सवीना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर प्रशिक्षु सीएचओ के पद पर सेवाएं दे रहे थे। मंगलवार को वह अपने साथी दीपेश कटारा के साथ किसी आधिकारिक कार्यवश अस्पताल परिसर से बाहर निकले ही थे कि बलीचा हाईवे की ओर से आ रहे एक अनियंत्रित और तेज रफ्तार ट्रेलर ने उनकी मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि अर्जुन लाल मेघवाल ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि दीपेश कटारा लहूलुहान होकर सड़क पर गिर पड़े। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग और अस्पताल का स्टाफ तुरंत मौके पर पहुंचा, लेकिन तब तक अर्जुन की सांसें थम चुकी थीं।
हादसे की खबर जंगल की आग की तरह फैल गई, जिसके बाद उदयपुर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत सैकड़ों सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) अस्पताल परिसर में एकत्रित हो गए। साथियों की मौत से आहत सीएचओ ने न केवल शोक व्यक्त किया, बल्कि प्रशासन की ढिलाई के खिलाफ कड़ा विरोध भी दर्ज कराया। आक्रोशित स्वास्थ्य कर्मियों ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें मृतक के शोकाकुल परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा देने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी मुहैया कराने की पुरजोर मांग की गई।
ज्ञापन सौंपने के दौरान सीएचओ संघ ने स्पष्ट किया कि 'हादसों के हाईवे' पर बढ़ती दुर्घटनाओं के बावजूद प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। अतिरिक्त जिला कलेक्टर ने प्रतिनिधिमंडल को सांत्वना देते हुए आश्वासन दिया है कि इस मामले में नियमानुसार त्वरित कार्रवाई की जाएगी और मुआवजे की मांग को उच्च स्तर तक पहुंचाया जाएगा। अर्जुन लाल मेघवाल की यह असामयिक मृत्यु न केवल उनके परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति है, बल्कि यह प्रशासन के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है कि रक्त रंजित होते इस हाईवे पर सुरक्षा के इंतजाम अब अनिवार्य हो चुके हैं।

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