उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर में रिश्तों की बेरुखी और गुमनामी के बीच दम तोड़ने वाले तीन इंसानी जिस्मों को आखिरकार बैकुण्ठ धाम सेवा संस्थान के माध्यम से सम्मानजनक विदाई नसीब हुई। शहर के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में मिली एक वृद्धा, एक अज्ञात पुरुष और एक बालिका के शव की शिनाख्त न हो पाने के कारण पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूर्ण कर उनका लावारिस के रूप में अंतिम संस्कार करवाया।

सविना थाना क्षेत्र के विजय सिंह पथिक नगर में पिछले 40 वर्षों से किराए के कमरे में रह रही राधा बाई नामक वृद्धा की मौत के बाद उसकी पहचान एक पहेली बनकर रह गई। क्षेत्र के घरों में काम कर अपना गुजर-बसर करने वाली इस महिला का आगे-पीछे कोई नहीं था और न ही किसी को उसके पैतृक गांव की जानकारी थी। बीती 1 मई को जब वृद्धा ने देर तक दरवाजा नहीं खोला, तो पड़ोसियों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने कमरे का दरवाजा तुड़वाया, जहां वह मृत अवस्था में पाई गई। शिनाख्त के तमाम प्रयासों की विफलता के बाद पुलिस ने पोस्टमार्टम करवाकर शव को अंतिम संस्कार हेतु संस्थान के सुपुर्द कर दिया।

इसी क्रम में, लेबर चौराहे पर कुछ दिनों पूर्व नग्न अवस्था में मिले एक अज्ञात पुरुष के शव की भी पहचान नहीं हो सकी। पुलिस जांच के अनुसार मृतक भिखारी था और काफी कोशिशों के बावजूद उसके परिजनों का सुराग नहीं मिला। रविवार को पुलिस ने लावारिस रूप में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कर शव बैकुण्ठ धाम सेवा संस्थान को सौंप दिया। वहीं, सूरजपोल थाना क्षेत्र के पेट्रोल पंप के पास मिली एक बालिका के शव के मामले में भी पुलिस को बड़ी सफलता हाथ नहीं लगी। परिजनों की तलाश में असमर्थ रहने के बाद, इस बालिका का भी पोस्टमार्टम करवाकर संस्थान के माध्यम से अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया। अपनों के अभाव में इन तीनों ही मृतकों की अंतिम यात्रा पुलिस प्रशासन और सेवाभावी संस्थान के सहयोग से पूर्ण हुई।

Pratahkal HQ

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