उदयपुर: श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान रहस्य महोत्सव में रासेश्वरी देवी के विचार
उदयपुर के हिरण मगरी में आयोजित भागवत कथा के दौरान रासेश्वरी देवी ने युवाओं को सोशल मीडिया की मोह-माया से दूर आत्म-निरीक्षण का संदेश दिया।

उदयपुर। ब्रज गोपिका सेवा मिशन के तत्वावधान में हिरण मगरी सेक्टर-13 स्थित आशीष वाटिका में आयोजित नौ दिवसीय पंचम वेद श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान रहस्य महोत्सव के तृतीय दिन आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ। कार्यक्रम के दौरान व्यासपीठ से पूजनीया रासेश्वरी देवी जी ने वेदों और पुराणों के उस सर्वोच्च दार्शनिक पक्ष को उद्घाटित किया, जो मानव मन को कलयुग के सांसारिक बंधनों से मुक्त करने की क्षमता रखता है। महोत्सव के तीसरे सत्र का शुभारंभ व्यासपीठ के पारंपरिक एवं भावपूर्ण पूजन तथा मंगल दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसके पश्चात संपूर्ण पंडाल पूजनीया मां के दिव्य जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
व्यासपीठ से श्रीमद्भागवत दर्शन की गहन व्याख्या करते हुए रासेश्वरी देवी जी ने प्रतिपादित किया कि परमात्मा की अनंत शक्तियों में उनकी 'कृपा शक्ति' सर्वोपरि है, जो कथा के माध्यम से जीव तक पहुंचती है। उन्होंने उपस्थित युवाओं और साधकों का आह्वान करते हुए सोशल मीडिया के वर्तमान दौर की कटु वास्तविकता पर प्रकाश डाला। देवी जी ने कहा कि आधुनिक मनुष्य वर्तमान में केवल प्रदर्शन और मान्यता प्राप्ति की दौड़ में सम्मिलित है। हम बाहरी दिखावे और इंस्टाग्राम की लोकप्रियता, लाइक्स एवं सार्वजनिक प्रतिक्रियाओं के आधार पर अपने आत्मविश्वास और मानसिक स्थिति का निर्धारण कर रहे हैं, जबकि आंतरिक रूप से मनुष्य खोखला और तनावग्रस्त होता जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मानव देह की प्राप्ति केवल भोग-वासनाओं की पूर्ति या सांसारिक समस्याओं के समाधान हेतु नहीं हुई है, अपितु इसका वास्तविक उद्देश्य आत्म-निरीक्षण द्वारा जीवन की प्राथमिकताओं का निर्धारण करना है। अंत में उन्होंने संदेश दिया कि भागवत रूपी कल्पवृक्ष का पका हुआ फल ही मानव जीवन को फलात्मक और दिव्य बनाता है, जो जीव को सही मार्ग प्रशस्त करता है।

