उदयपुर। शहर के सेक्टर-8 स्थित चंद्रशेखर महादेव मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का पंचम दिवस भगवान श्रीकृष्ण की मनोहारी बाल लीलाओं के अलौकिक दर्शन का साक्षी बना। वृन्दावन धाम के पीठधीश्वर मानस मर्मज्ञा श्री कृष्णानंदजी महाराज के मुखारविंद से कथा के प्रसंगों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्ति के सागर में डुबो दिया। कथा श्रवण के दौरान संपूर्ण वातावरण भक्ति रस से सराबोर रहा और श्रद्धालु दिव्य आनंद की अनुभूति में भावविभोर दिखाई दिए।

महाराज श्री कृष्णानंदजी ने कथा के दौरान पूतना वध के प्रसंग का अत्यंत विस्तार और मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार पूतना राक्षसी ने बालकृष्ण को स्तनपान कराने के कुटिल उद्देश्य से उन्हें अपनी गोद में उठाया, किंतु सर्वव्यापी श्रीकृष्ण ने उसे मारकर उसका उद्धार कर दिया। इसके उपरांत उन्होंने माता यशोदा द्वारा भगवान बालकृष्ण को पंचगव्य से स्नान कराने के प्रसंग का सजीव चित्रण किया, जिसने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कथा के क्रम में गोवर्धन लीला और भगवान के दिव्य ब्रह्मांड दर्शन का भी अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया।

भक्ति और सेवा के महत्व को रेखांकित करते हुए महाराज ने कहा कि वास्तविक धनवान वही व्यक्ति है जो अपने तन, मन और धन को सेवा एवं भक्ति के कार्यों में समर्पित करता है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को प्रेरित करते हुए कहा कि वर्तमान युग में वही व्यक्ति धनी है जो अपना जीवन पूर्णतः परमात्मा के प्रति समर्पित रखता है। महाराज ने अपने प्रवचन में यह स्पष्ट किया कि ईश्वर की प्राप्ति का एकमात्र मार्ग केवल सच्चा प्रेम और अनन्य भक्ति ही है। कथा के समापन तक पंडाल भक्तिमय संगीत और श्रीकृष्ण के जयकारों से गुंजायमान रहा।

Pratahkal HQ

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