उदयपुर स्थित सरस डेयरी के वेयर हाऊस से 25 लाख रुपये मूल्य के दूध पाउडर के गबन मामले में कानून का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। इस गंभीर प्रकरण में अहमदाबाद के आरोपी विवेक सिंह को बड़ा झटका देते हुए जिला एवं सेशन न्यायाधीश ज्ञान प्रकाश गुप्ता ने उसकी तीसरी अग्रिम जमानत याचिका भी खारिज कर दी है। षडयंत्र के तहत दुग्ध उत्पादक संघ के वेयर हाऊस से पाउडर के 250 कट्टों की हेराफेरी कर उन्हें औने-पौने दामों में गुजरात के व्यापारियों को बेचने का यह मामला अब न्याय की दहलीज पर खड़ा है।

प्रकरण का खुलासा 16 सितंबर 2025 को कोट कुराबड स्थित दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति लिमिटेड के अध्यक्ष भेरूलाल पटेल द्वारा पुलिस अधीक्षक के समक्ष पेश परिवाद से हुआ। परिवादी ने आरोप लगाया कि उदयपुर दुग्ध सहकारी संघ लिमिटेड गोवर्धन विलास के अध्यक्ष डालचंद डांगी, पूर्व प्रबंध निदेशक विपिन शर्मा, स्टोर प्रभारी कन्हैयालाल और संयत्र प्रभारी वीके व्यास ने सुनियोजित षडयंत्र रचा। योजना के अनुसार, 23 जुलाई 2025 को अध्यक्ष के निर्देश पर संयत्र प्रभारी वीके व्यास ने प्लांट में आवश्यकता का हवाला देते हुए वेयर हाऊस से 6250 किलो वजन वाले 250 दूध पाउडर के कट्टे गुजरात पंजीयन वाले वाहन में लोड करवाए। इन कट्टों को प्लांट में भेजने के बजाय आरोपियों ने मिलीभगत कर अहमदाबाद के व्यापारियों को 14 लाख 37 हजार 500 रुपये में बेच दिया। जांच में टोल प्लाजा की पर्चियों और अन्य दस्तावेजों से इस गबन की पुष्टि हुई है। साथ ही, डेयरी के स्टॉक में 15-15 लीटर के 400 टीन घी की भी कमी पाई गई, जिसकी कीमत 35.37 लाख रुपये आंकी गई है, जिसे लेकर गोवर्धन विलास थाने में मामला दर्ज किया गया।

इस मामले में लिप्त आरोपी विवेक सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक डॉ. रामकृपा शर्मा ने पुरजोर विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि राजस्थान उच्च न्यायालय ने 6 अप्रैल 2026 को आरोपी की एफआईआर निरस्त करने की याचिका को खारिज कर दिया था। अनुसंधान में यह स्पष्ट हो चुका है कि विवेक सिंह ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर षडयंत्रपूर्वक दूध पाउडर के कट्टों का सौदा किया और प्राप्त राशि को आंगडिया फर्म लच्छीराम उर्फ लक्ष्मण और डालचंद तक पहुंचाया। आरोपी विवेक सिंह की ओर से इससे पूर्व 23 अप्रैल और 15 मई को लगाई गई जमानत याचिकाएं भी खारिज हो चुकी हैं। अपराध की गंभीरता और रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों को संज्ञान में लेते हुए न्यायालय ने पुनः आरोपी की तीसरी अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र को नामंजूर कर दिया है। यह फैसला सरकारी संपत्ति के साथ की गई धोखाधड़ी के प्रति न्यायपालिका की कठोर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

Pratahkal HQ

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