उदयपुर। सनातन पाठशाला द्वारा आयोजित बाल संस्कार शिविर के दूसरे दिन मंगलवार को आध्यात्मिक और शारीरिक चेतना का अनूठा संगम देखने को मिला। शिविर के दौरान वैदिक पुरोहित भूपेंद्र शर्मा ने यज्ञ प्रशिक्षण सत्र में प्रशिक्षणार्थियों को 'आर्य' अर्थात श्रेष्ठ मानव बनने का संकल्प दिलाया। इस दौरान उन्होंने 'स्वाहा' के गूढ़ अर्थ को स्पष्ट करते हुए कहा कि यज्ञ का वास्तविक उद्देश्य अपने भीतर की बुराइयों का त्याग कर अच्छाइयों को आत्मसात करना है।

शिविर की गतिविधियों को आगे बढ़ाते हुए मीडिया प्रभारी जिग्नेश शर्मा ने जानकारी दी कि योगाचार्य प्रीतम सिंह चुंडावत ने बच्चों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को शारीरिक ऊंचाई बढ़ाने के लिए ताड़ासन, त्रियटक आसन और विभिन्न सूक्ष्म क्रियाओं का अभ्यास कराया। साथ ही, सूर्य नमस्कार को मंत्रों के साथ संपन्न करवाकर युवाओं में ऊर्जा का संचार किया। संस्कार शिविर के शैक्षणिक पक्ष को मजबूत करते हुए संस्कृत भारती, चित्तौड़ प्रांत के बाल संस्कार प्रमुख कुलदीप जोशी ने प्रशिक्षणार्थियों को संस्कृत भाषा में अपना परिचय देना सिखाया, जिससे उनमें भाषा के प्रति रुचि उत्पन्न हुई। शिविर का समापन आचार्य त्रिभुवन व्यास द्वारा देशभक्ति गीत 'चंदन है इस देश की माटी तपोवन भूमि हर धाम है' के सामूहिक अभ्यास के साथ हुआ। इस प्रस्तुति ने न केवल उपस्थित लोगों में भक्ति की भावना जागृत की, बल्कि शिविर के उद्देश्यों को एक राष्ट्रभक्तिपूर्ण नई दिशा प्रदान की।

Pratahkal HQ

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