उदयपुर: सनातन पाठशाला के बाल संस्कार शिविर में बच्चों को सिखाए जा रहे संस्कार
सनातन पाठशाला समिति के शिविर में बच्चों को आत्मरक्षा, योग और वैदिक परंपराओं का प्रशिक्षण दिया गया, जिससे उनके सर्वांगीण विकास पर जोर दिया जा रहा है।

उदयपुर। सनातन धर्म के मूल आधार अहिंसा, प्रेम, सेवा, शांति और बंधुत्व के शाश्वत मूल्यों को नई पीढ़ी में आत्मसात करने के उद्देश्य से उदयपुर में सनातन पाठशाला समिति द्वारा आयोजित बाल संस्कार शिविर शिक्षा और संस्कार का अनूठा संगम बन गया है। शिविर के पांचवें दिन शुक्रवार को प्रशिक्षणार्थियों को खेल-खेल में जीवनोपयोगी शिक्षाएं प्रदान की गईं। इस दौरान मैदानी खेलों के माध्यम से बच्चों में परस्पर सहयोग, नेतृत्व क्षमता और आपसी तालमेल के भाव को विकसित करने पर विशेष बल दिया गया।
शिविर के दौरान सुरक्षा और आत्मबल पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। जिला पुलिस अधीक्षक के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) के मार्गदर्शन में कालिका पेट्रोलियम की टीम ने बच्चों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया, जिसका उद्देश्य उनमें आत्मविश्वास और साहस का संचार करना था। इसके साथ ही, शिक्षाविद शकुंतला माहेश्वरी ने प्रेरक बाल कहानियों के माध्यम से बच्चों के चरित्र निर्माण पर प्रकाश डाला।
संवाद प्रभारी एवं योगाचार्य जिग्नेश शर्मा ने मानसिक स्पष्टता और एकाग्रता के महत्व को समझाते हुए स्मरण शक्ति बढ़ाने हेतु विशेष आसन, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास करवाया। शिविर के बौद्धिक सत्र में सनातन पाठशाला समिति के संयोजक भूपेंद्र शर्मा ने बच्चों को वेद, दर्शन और उपनिषदों की गरिमामयी परंपराओं से परिचित कराया। संस्कारों की यह पाठशाला बच्चों को भारतीय संस्कृति की जड़ों से जोड़ने की दिशा में एक प्रभावी कदम सिद्ध हो रही है, जिससे भावी पीढ़ी न केवल नैतिक रूप से सशक्त हो रही है, बल्कि प्राचीन ज्ञान-विज्ञान के प्रति भी जागरूक हो रही है।

