उदयपुर: 'रामाश्रय' नवीन रागात्मक शैली का लोकार्पण और विद्यापीठ में सांस्कृतिक संध्या आयोजित
मेवाड़ जन शक्ति दल द्वारा 'ठुमक चलत रामचंद्र' भजन का नवीन शैली में विमोचन और आरएसएस के शिविर में गवरी व लोक नृत्यों के माध्यम से राजस्थानी संस्कृति का प्रदर्शन।

उदयपुर। मेवाड़ जन शक्ति दल एवं उर्दू विभाग मोहन लाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में 'रामाश्रय - नवीन रागात्मक शैली' का भव्य एवं आध्यात्मिक आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम प्रभु श्रीराम को समर्पित रहा, जिसमें भक्ति, संगीत और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। मेवाड़ जनशक्ति दल के संस्थापक नरेश कुमार शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण तेरह वर्षीय उदीयमान गायिका डॉरिस शर्मा रहीं, जिनके मधुर स्वरों में 'ठुमक चलत रामचंद्र' भजन का नवीन रागात्मक शैली में लोकार्पण किया गया। इसके साथ ही अंकित चौहान द्वारा हनुमान चालीसा तथा कपिल पालीवाल द्वारा स्वरचित श्रीराम स्तुति का लोकार्पण भी हुआ।
आध्यात्मिक आयोजन एवं विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रतीकात्मक रूप से हनुमानजी को समर्पित रही। विशिष्ट अतिथियों में मेवाड़ महामंडलेश्वर हितेश्वरानंद सरस्वती महाराज, पूर्व महापौर रवीन्द्र श्रीमाली, अतुल चंडालिया एवं स्वच्छ भारत मिशन के ब्रांड एम्बेसडर के.के. गुप्ता उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत मेवाड़ जन शक्ति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष कपिल पालीवाल, संगठन संस्थापक नरेश शर्मा एवं मुख्य संरक्षक धीरेंद्र सच्चान द्वारा किया गया। शास्त्रीय नृत्यांगना झलक भट्ट ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद डॉरिस शर्मा का परिचय एवं आशीर्वाद वीडियो प्रदर्शित किया गया। समस्त भजनों का संगीत संयोजन एवं रिकॉर्डिंग झलकप्रिया स्टूडियोज में किया गया, जिसके संस्थापक चैतन्य भट्ट हैं। इस अवसर पर महामंडलेश्वर हितेश्वरानंद सरस्वती महाराज द्वारा चैतन्य भट्ट एवं कपिल पालीवाल का विशेष स्वागत भी किया गया।
स्वयंसेवकों के लिए सांस्कृतिक संध्या और गवरी का मंचन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय आसन एवं योग नेपुण्य शिविर में देश के विभिन्न हिस्सों से आए स्वयंसेवकों के लिए सांस्कृतिक संध्या आयोजित की गई। राजस्थान विद्यापीठ सभागार में आयोजित कार्यक्रम में कलाकारों ने गवरी, कठपुतली और राजस्थानी नृत्यों की प्रस्तुतियां दी। शिविर में देशभर के विभिन्न प्रांतों से स्वयंसेवक भाग ले रहे हैं, जिन्हें राजस्थानी संस्कृति एवं आदिवासी संस्कृति से परिचित कराने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारम्भ संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी जगदीश और श्रीवर्द्धन ने दीप प्रज्वलन कर किया। गंगाराम गमेती के नेतृत्व में टीम ने आदिवासी समाज के प्रमुख धार्मिक लोकनाट्य गवरी का मंचन कर मेवाड़ अंचल की सांस्कृतिक परम्परा को जीवंत कर दिया।
राजस्थानी लोक नृत्यों और संगीत की विविध प्रस्तुतियां
बणजारे की कथा को प्रस्तुत कर कलाकारों ने भील संस्कृति का प्रदर्शन किया, जिसका देश के सभी राज्यों से आये स्वयंसेवकों ने भरपूर आनंद उठाया। कौमुदि और कल्याणी ने राजस्थानी घूमर पर अपनी प्रस्तुति दी। राजस्थानी कला और संस्कृति को समर्पित विरासत ग्रुप के कलाकारों ने विभिन्न राजस्थानी नृत्य प्रस्तुत किये। महेश आमेटा के नेतृत्व में राजू भाट ने राजस्थानी कठपुतली कला का शानदार प्रदर्शन किया। लूना आमेटा, पायल वैष्णव, आकांक्षा प्रजापत, खुशी व तारा ने राजस्थान के प्रमुख नृत्यों घूमर, चरी, भवई, कालबेलिया, गणगौर, तेरहताल की सुंदर प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को राजस्थानी रंग में रंग दिया। वहीं महबूब खां के नेतृत्व में लंगा मांगणियार कलाकारों ने प्रत्येक प्रस्तुति के साथ संगत कर राजस्थानी संगीत का प्रभावी प्रदर्शन किया।
(कैप्शन: विद्यापीठ 4 - उदयपुर। कार्यक्रम में गवरी, कठपुतली और राजस्थानी नृत्यों की प्रस्तुतियां देते कलाकार।)

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