उदयपुर। उत्तर पश्चिम रेलवे ने उदयपुर-डूंगरपुर रेलखंड पर मूक और पालतू पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्राथमिकता के साथ बाउंड्री वॉल और तारबंदी के निर्माण के लिए 158 करोड़ रुपये का बजट जारी किया है। इस पहल के तहत चित्तौड़गढ़-उदयपुर-हिम्मतनगर तक रेलवे ट्रैक को सुरक्षित करने की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, निविदा फरवरी तक जारी होने और मार्च में निर्माण कार्य प्रारंभ होने के बाद इस परियोजना के पूरा होने से हजारों पशुओं के जीवन की रक्षा होगी। इसी कारण 1 जनवरी 2026 को उदयपुर रेलवे स्टेशन पर प्रस्तावित आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।

यह तीन साल लंबी मुहिम का प्रत्यक्ष परिणाम है, जो भगवान महावीर और सनातन धर्म के प्राणी मात्र के प्रति दया के सिद्धांत पर आधारित रही। फरवरी 2023 में सेमारी के हिमालय जैन, भरत कुमार जैन और उनकी टीम ने उदयपुर-डूंगरपुर रेलवे ट्रैक पर होने वाले पशु हादसों को रोकने के लिए जीव रक्षा और जन जागरूकता अभियान की शुरुआत की। इस अभियान के अंतर्गत उदयपुर-डूंगरपुर ट्रैक के आसपास बसे 54 गांवों के 500 किमी संवेदनशील क्षेत्रों में पत्रक वितरित किए गए और निजी वाहन व साउंड सिस्टम के माध्यम से ग्रामीणों को अपने पशुओं को रेलवे ट्रैक से दूर रखने का निवेदन किया गया।

इस दौरान, सेमारी टीम ने समय-समय पर दिल्ली, जयपुर, अजमेर, उदयपुर और डूंगरपुर जाकर रेल अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपकर ट्रैक पर तारबंदी की मांग की। ढाई वर्ष तक चले इस प्रयास ने देशभर के गौसेवकों का ध्यान खींचा। 9 अक्टूबर को सेमारी रेलवे स्टेशन पर गौसेवक शैलेष त्रिवेदी, अभिषेक चौहान, सागर मेहता, निखिल पडियार, सुरेंद्र सिंह पंवार, गौ रक्षा दल मेवाड उदयपुर, गौ रक्षा दल मारवाड़, हाडौती, मालवा, पंजाब, हरियाणा, गुजरात, वागड़ बने वृंदावन टीम, रौनक चौधरी, पंकज जोशी, वी वागड़, श्री गोपाल परिवार संघ, ष्टस््रस्न टीम, मेनारिया समाज, जैन समाज सहित हजारों आमजन और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स एकत्रित हुए।

इस आंदोलन ने ‘खूनी ट्रैक’ अभियान के रूप में ट्विटर और अन्य सोशल प्लेटफॉर्म्स पर व्यापक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया। 7 दिसंबर 2025 को राजस्थान के सभी रेलवे स्टेशनों पर प्रधानमंत्री, रेल मंत्री, महाप्रबंधक जयपुर, मंडल प्रबंधक अजमेर और स्टेशन अधीक्षकों को स्थायी तारबंदी की मांग को लेकर ज्ञापन प्रस्तुत किए गए। इस मुहिम को संत महात्माओं, किन्नर समाज राजस्थान और विभिन्न पक्ष-विपक्ष के जनप्रतिनिधियों का समर्थन भी मिला।

रेलवे प्रशासन का यह कदम न केवल पशुओं की सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसे नागरिक जागरूकता और सामूहिक प्रयास की सफल कहानी के रूप में भी देखा जा रहा है। इस पहल से उदयपुर-डूंगरपुर रेलखंड अब मूक और पालतू पशुओं के लिए सुरक्षित मार्ग बन जाएगा और वर्षों से चली आ रही घटनाओं पर अंकुश लगेगा।

Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story