उदयपुर में गौमाता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने के लिए प्रदर्शन और नारेबाजी
उदयपुर कलेक्ट्रेट पर गौभक्तों ने राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन, गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध और गोचर भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने की रखी मांग।

उदयपुर (नगर संवाददाता)। राजस्थान की झीलों की नगरी उदयपुर में सोमवार को गौवंश संरक्षण और 'गौमाता' को 'राष्ट्र माता' का गौरवपूर्ण दर्जा दिलाने की मांग को लेकर जन-सैलाब उमड़ पड़ा। सैकड़ों की संख्या में एकत्रित गौभक्तों ने अपनी मांगों के समर्थन में टाउन हॉल से एक विशाल रैली का आगाज किया, जो शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से गूँजते हुए जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंची। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी करते हुए सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाई।
कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन के उपरांत गौभक्तों ने प्रशासन के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के जरिए गौभक्तों ने देशभर में गौहत्या पर पूर्ण और तत्काल प्रतिबंध लगाने, गौवंश के चरने हेतु आरक्षित गोचर भूमि को हर प्रकार के अतिक्रमण से मुक्त कराने तथा गौवंश के प्रभावी संरक्षण हेतु बेहद सख्त कानून बनाने की पुरजोर वकालत की। उल्लेखनीय है कि यह विरोध प्रदर्शन केवल उदयपुर जिला मुख्यालय तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि जिले की सभी तहसीलों में भी इसी संवेदनशील मुद्दे पर एक साथ प्रदर्शन किए गए।
प्रदर्शन में विशेष रूप से शामिल संत समाज के प्रतिनिधि महामंडलेश्वर ईश्वरी नंदगिरी ने आयोजन को संबोधित करते हुए कहा कि यह व्यापक अभियान 'गौसेवा आह्वान' के बैनर तले शुरू किया गया है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य देशभर में गौ-संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लंबे समय से छोटे स्तरों पर आंदोलन होते रहे हैं, किंतु अब संत समाज ने इसे एक व्यापक और संगठित स्वरूप देने का निर्णायक संकल्प ले लिया है।
संतों और गौभक्तों ने सरकार को दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र और गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो भविष्य में यह आंदोलन राष्ट्रव्यापी स्तर पर उग्र रूप धारण कर सकता है, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

