उदयपुर। सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत राज संस्थाओं एवं नगर निगम निकायों के चुनाव में ओबीसी को आरक्षण प्रदान कराने के लिए ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया अनिवार्य की गई है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत राज्य सरकार को ओबीसी वर्ग की वास्तविक सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक स्थिति का वैज्ञानिक एवं तथ्यात्मक अध्ययन करना आवश्यक है, जिसके आधार ही आयोग द्वारा आरक्षण के सम्बन्ध में उचित अनुशंसा की जाएगी।

सर्वे में लापरवाही और त्रुटिपूर्ण आंकड़ों पर आपत्ति

सर्व ओबीसी समाज महापंचायत ट्रस्ट उदयपुर के अध्यक्ष लोकेश चौधरी ने बताया कि "राज्य सरकार द्वारा प्रगणक द्वारा घर घर जाकर 19 बिंदुओं की जानकारी प्राप्त कर आयोग को उपलब्ध करानी थी।" कई स्थानों से जानकारी मिली है कि संबंधित विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों ने घर-घर न जाकर औपचारिक रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है। जो त्रुटिपूर्ण जानकारी दी जा रही है जिससे आयोग वास्तविक जानकारी न मिलने से ओबीसी को समुचित आरक्षण नहीं मिल पाएगा।

प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से सरकार को चेतावनी

इसी संदर्भ में सर्व ओबीसी समाज महापंचायत ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने जिलाधीश के माध्यम से अध्यक्ष अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग, मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव राजस्थान सरकार को ज्ञापन के माध्यम से अवगत कराया जाएगा। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि "ज्ञापन के बाद भी घर घर सर्वे नहीं कराया जाता है तो ओबीसी समाज द्वारा तीव्र आंदोलन किया किया जाएगा।" ज्ञापन देने में अध्यक्ष लोकेश चौधरी, सचिव किसन लाल राव, भेरूलाल भोई, दिवाकर माली, अशोक मेवाड़ा, रमिला पंचाल सहित कई लोग उपस्थित थे।

Pratahkal Bureau

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