उदयपुर: नर्सिंगकर्मियों ने खून से लिखा मुख्यमंत्री को पत्र, भर्ती विज्ञापन न निकलने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी
उदयपुर के एमबी अस्पताल में संविदा नर्सिंगकर्मियों ने खून से पोस्टकार्ड लिखकर मुख्यमंत्री से स्थायी भर्ती और बोनस अंकों की मांग की है। नए साल पर हुए इस प्रदर्शन में 1000 से अधिक कर्मियों ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। जानें क्या हैं उनकी मांगें और क्यों उबाल पर हैं उदयपुर के स्वास्थ्य कर्मी।

उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर के सबसे बड़े महाराणा भूपाल (एमबी) चिकित्सालय में साल के पहले ही दिन विरोध का एक ऐसा मंजर देखने को मिला जिसने शासन और प्रशासन दोनों को हिलाकर रख दिया है। अपनी वर्षों पुरानी मांगों और अनिश्चित भविष्य को लेकर संविदा एवं निविदा पर कार्यरत नर्सिंगकर्मियों ने सोमवार को अपने ही खून से मुख्यमंत्री और चिकित्सा मंत्री के नाम पोस्टकार्ड लिखकर सरकार के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है। मेडिकल कॉलेज परिसर के गार्डन में एकत्रित हुए इन कर्मचारियों ने न केवल नारेबाजी की, बल्कि स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि जल्द ही स्थायी भर्ती का विज्ञापन जारी नहीं किया गया तो यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन एक उग्र आंदोलन में तब्दील हो जाएगा।
नए साल के पहले दिन को संघर्ष के प्रतीक के रूप में चुनते हुए जिले के करीब एक हजार संविदा नर्सिंगकर्मियों ने इस अनूठे प्रदर्शन में भाग लिया। बीते 4 से 5 वर्षों से अल्प मानदेय पर अपनी सेवाएं दे रहे इन स्वास्थ्य रक्षकों का दर्द उनके द्वारा लिखे गए 'रक्त-पत्रों' में साफ झलका। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि सरकार जल्द से जल्द स्थायी नर्सिंग भर्ती प्रक्रिया शुरू करे और इसमें अनुभव के आधार पर प्रति वर्ष 10 अंक के हिसाब से अधिकतम 30 बोनस अंक (10, 20, 30 के फार्मूले पर) प्रदान किए जाएं। कर्मचारियों का तर्क है कि वे विपरीत परिस्थितियों में भी न्यूनतम वेतन पर स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं, ऐसे में उन्हें प्राथमिकता देना सरकार का नैतिक दायित्व है।
इस विरोध प्रदर्शन की गूंज पूरे मेडिकल कॉलेज परिसर में सुनाई दी, जहाँ यूटीबी (UTB), संविदा और निविदा नर्सेज के साथ-साथ आरएमआरएस (RMRS), 108 एम्बुलेंस नर्सेज, एएनएम (ANM), पैरामेडिकल स्टाफ और फार्मासिस्ट जैसे विभिन्न संवर्गों के अस्थायी कर्मचारी भी एकजुट होकर शामिल हुए। आंदोलनकारी नर्सिंगकर्मियों ने बताया कि वे लंबे समय से मेरिट और बोनस अंकों के आधार पर स्थायी भर्ती की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है।
कार्यक्रम के अंत में कर्मचारियों ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वे अब और प्रतीक्षा करने के मूड में नहीं हैं। सरकार को भेजे गए इन खून से सने पत्रों के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि नर्सिंगकर्मी अपने हक के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। यदि सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से लेते हुए तुरंत विज्ञापन जारी नहीं करती है, तो आगामी दिनों में पूरे संभाग के स्वास्थ्य कर्मी काम बंद कर सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन की होगी।

Pratahkal Bureau
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