चित्तौड़गढ़ (प्रातःकाल संवाददाता)। सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ का प्रांगण सोमवार को उस समय भावनाओं और यादों से सराबोर हो उठा, जब वर्ष 1968-75 बैच के पूर्व छात्र अपने आल्मा मेटर में स्वर्ण जयंती उत्सव के अवसर पर एकत्र हुए। पाँच दशकों पुरानी यादों को ताजा करते हुए इन पूर्व छात्रों ने न केवल अपने विद्यालय के गौरवमयी इतिहास को नमन किया, बल्कि अपने गुरुओं और साथियों के साथ अविस्मरणीय क्षण साझा किए।

शंकर मेनन सभागार में आयोजित इस भव्य समारोह का शुभारंभ विद्यालय के प्राचार्य कर्नल अनिल देव सिंह जसरोटिया, उप प्राचार्य लेफ्टिनेंट कर्नल पारुल श्रीवास्तव एवं प्रशासनिक अधिकारी मेजर सी. श्रीकुमार ने अतिथियों के स्वागत के साथ किया। इस अवसर पर स्कूल जनसंपर्क अधिकारी बाबूलाल शिवरान ने बताया कि समारोह में विद्यालय की उपलब्धियों और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु चलाए जा रहे कार्यक्रमों की जानकारी साझा की गई।

प्राचार्य कर्नल जसरोटिया ने अपने संबोधन में कहा कि सैनिक स्कूल न केवल शिक्षा का मंदिर है, बल्कि यह अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्रप्रेम की भावना का केंद्र भी है। उन्होंने बताया कि विद्यालय में अंग्रेजी संवाद कार्यक्रम, क्लब गतिविधियां, फैकल्टी विकास, केपेसिटी बिल्डिंग, साहित्यिक व खेलकूद आयोजनों के साथ-साथ "एक भारत श्रेष्ठ भारत", "चंद्रयान", "वीर गाथा" और "प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना" जैसे राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जो कैडेट्स को अपनी प्रतिभा और क्षमताओं को निखारने का अवसर प्रदान करते हैं।

गोल्डन जुबली बैच की ओर से कर्नल राज सिंह, मेजर जनरल रानू सिंह, मुकुल प्रकाश गुप्ता और कर्नल राजवीर सिंह सांगवान ने सभी उपस्थितजनों का स्वागत करते हुए अपनी स्मृतियों को साझा किया। इस अवसर पर स्वर्ण जयंती बैच के पूर्व छात्रों ने अपने सेवानिवृत्त शिक्षकों का शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया। विद्यालय प्रशासन ने भी सभी पूर्व छात्रों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।

स्वर्ण जयंती बैच ने विद्यालय को सभी सदनों के नामों और ऐतिहासिक छायाचित्रों से सुसज्जित एक भित्तिचित्र भेंट किया, जिसे विद्यालय के प्रेरणास्रोत के रूप में स्थापित किया जाएगा। कार्यक्रम में 1968-75 बैच के कर्नल रजनीश, राकेश, महेंद्र जाखड़, गुरु प्रकाश वर्मा, डॉ. सुरेंद्र, किशन सिंह, हिम्मत सिंह, मेजर जनरल रानू सिंह, कमांडर प्रह्लाद पूनिया सहित अनेक वरिष्ठ पूर्व छात्र, सेवानिवृत्त शिक्षक और वर्तमान स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे।

समापन पर गोल्डन जुबली बैच के कमांडर प्रह्लाद सिंह पूनिया और वर्तमान स्कूल कैप्टन मयंक विश्वकर्मा ने विद्यालय प्रशासन और सभी उपस्थितजनों के प्रति आभार व्यक्त किया। मंच संचालन कैडेट हर्ष राज सिंह ने किया।

विद्यालय परिसर में गूंजती हंसी, साझा की गई यादें और अतीत की गौरवगाथा ने एक बार फिर यह साबित किया कि सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ केवल एक संस्था नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माण का प्रेरणास्रोत है।

Pratahkal Bureau

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