चित्तौड़गढ़ (प्रातःकाल संवाददाता)। कृषि विज्ञान केन्द्र, दरा में आयोजित 15 दिवसीय खुदरा उर्वरक विक्रेता प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम प्रशिक्षण का समापन समारोह उत्साहपूर्ण माहौल में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि राजस्व अपील प्राधिकारी सुरेश चन्द्र खटीक ने प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे सच्ची लगन, निष्ठा और ईमानदारी से अपने व्यवसाय को अपनाएं तथा किसानों को सही समय पर वैज्ञानिक सुझाव देकर अप्रत्यक्ष रूप से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाले “परिवर्तन के अभिकर्ता” बनें।

समारोह के दौरान डॉ. आर.एल. सोनी, निदेशक प्रसार, प्रसार शिक्षा निदेशालय ने प्रतिभागियों को कृषि विज्ञान केन्द्र से निरंतर जुड़े रहने का आह्वान किया ताकि वे कृषि क्षेत्र में हो रहे नवाचारों से अद्यतन रहकर किसानों को अधिकतम लाभ पहुँचा सकें। डॉ. रतन लाल सोलंकी ने टिकाऊ खेती, समन्वित कृषि पद्धति, फसल विविधीकरण और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन जैसे विषयों पर जानकारी देते हुए उर्वरक उपयोग दक्षता बढ़ाने के उपाय बताए।

प्रशिक्षण समन्वयक दीपा इंदौरिया ने बताया कि चित्तौड़गढ़ एवं भीलवाड़ा जिले की विभिन्न पंचायत समितियों से 50 प्रशिक्षणार्थियों ने इस कोर्स में भाग लिया। उन्हें विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों एवं कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक ज्ञान प्रदान किया गया।

संयुक्त निदेशक कृषि विभाग दिनेश जागा ने उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के तहत लागू नियमों पर विस्तृत चर्चा की और कृषि आदान की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उपाय बताए। वहीं, उप निदेशक उद्यान विभाग डॉ. शंकर लाल जाट ने प्रशिक्षणार्थियों को उर्वरक नियंत्रण आदेश के विभिन्न प्रावधानों, उद्यान विभाग की योजनाओं एवं अनुदान नीतियों की जानकारी दी।

कार्यक्रम में ओ.पी. शर्मा ने फसलों की उन्नत शस्य क्रियाओं और संतुलित उर्वरक उपयोग पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर रमेश आमेटा, विक्रम सिंह, डॉ. दिनेश चौधरी, जोगेन्द्र सिंह, अंशु चौधरी, ज्योति प्रकाश सिरोया, महेन्द्र डूडी, मुकेश आमेटा और शंकर लाल नाई सहित अनेक विशेषज्ञों ने विचार व्यक्त किए।

समापन के बाद नवीना शेखावत के नेतृत्व में प्रशिक्षणार्थियों ने सीताफल उत्कृष्टता केन्द्र का भ्रमण किया, जहाँ उन्होंने हाईटेक नर्सरी, पॉलीहाउस, प्रसंस्करण इकाई और सीताफल की विभिन्न उन्नत किस्मों का अवलोकन किया।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम ने न केवल प्रतिभागियों के ज्ञान को समृद्ध किया, बल्कि उन्हें कृषि नवाचारों के माध्यम से किसानों के हित में सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा भी दी।

Pratahkal Bureau

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