उदयपुर। शहर के सविना ग्रामीण पंचायत के बड़ीगढ़ कोटडियां फलां क्षेत्र में फैले भूमाफिया-जाल का मुखिया आखिरकार सामने आ गया है। यूडीए की लगभग दो लाख वर्गफीट जमीन को फर्जी एग्रीमेंट और राजनीतिक संरक्षण के बल पर बेचने वाला शख्स कोई और नहीं, बल्कि सोहन मेघवाल निकला है। जिसने भोले-भाले लोगों को पट्टा मिलने का लालच देकर लाखों रुपये ऐंठ लिए, और अब जब पूरा मामला उजागर हो गया है तो उसके राजनीतिक संरक्षक भी उससे किनारा कर चुके हैं।

यूडीए अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस क्षेत्र की अधिकांश जमीनों की बिक्री में मेघवाल का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। विभाग ने अब उसके और उसके सहयोगियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी शुरू कर दी है। इधर, जिन लोगों ने अपनी जीवनभर की कमाई से प्लॉट खरीदे थे, वे अब न्याय की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, सविना ग्रामीण पंचायत के बड़ीगढ़ कोटडियां क्षेत्र में यूडीए की लगभग दो लाख वर्गफीट जमीन स्थित है। इस जमीन पर लंबे समय से राजनीतिक दबदबा बनाए रखने वाले कुछ भाजपा नेताओं की नजर थी। जैसे ही मौका मिला, कब्जों का सिलसिला शुरू हुआ और नाम मात्र के 500 रुपये के एग्रीमेंट पर जमीनें अपने चहेतों के नाम पर कब्जाई जाने लगीं। इसके बाद शुरू हुआ प्लॉटों की बंदरबांट का खेल, जिसमें सोहन मेघवाल ने ‘प्लानिंग’ तैयार कर जाल बिछाया।

मेघवाल ने प्रारंभ में तीन से पाँच लाख रुपये में एक हजार वर्गफीट के प्लॉट बेचने शुरू किए। यूडीए के पास मौजूद कुछ एग्रीमेंट दस्तावेज़ों में उसके हस्ताक्षर विक्रेता और गवाह, दोनों रूपों में पाए गए हैं। बाद में उसने अन्य दलालों को कमीशन पर जोड़कर प्लॉटों की बिक्री का कारोबार फैलाया, जिससे बड़ी रकम उसके पास पहुंची।

स्थानीय सूत्रों का कहना है कि सोहन मेघवाल को इस पूरे ऑपरेशन में राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था। जब कभी किसी ने एग्रीमेंट पर सवाल उठाया, तो वह बड़े नेताओं के नाम लेकर भरोसा दिलाता कि यहां “बड़े-बड़े नेताओं की जमीनें” हैं और यूडीए कुछ नहीं कर पाएगा। यही झांसा देकर उसने आम नागरिकों को अपने जाल में फंसाया और करोड़ों रुपये का सौदा किया।

यूडीए अधिकारियों का कहना है कि मामले में पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं, जिनमें सोहन मेघवाल के हस्ताक्षर वाले एग्रीमेंट शामिल हैं। कई दस्तावेजों में वह गवाह के रूप में भी दर्ज है। अब विभाग ने यह तय किया है कि पीड़ित शिकायत करें या नहीं, यूडीए स्वयं ही उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाएगा।

जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि सोहन मेघवाल प्लॉट बेचते समय खरीदारों को यह गारंटी देता था कि उन्हें भविष्य में “आसानी से पट्टा मिल जाएगा”। वह दावा करता था कि “यहां नेताओं का माल है”, इसलिए किसी को डरने की जरूरत नहीं। अब जब मामला खुलकर सामने आया है, तो जिन नेताओं ने उसे संरक्षण दिया था, वे उसे पहचानने से भी इंकार कर रहे हैं।

यूडीए के आगामी कदमों से यह स्पष्ट हो गया है कि सविना ग्रामीण क्षेत्र की यह जमीन घोटाला अब बड़े राजनीतिक चेहरों तक जा सकता है। यदि पुलिस ने निष्पक्ष जांच की तो कई रसूखदार नाम इस जाल में फंस सकते हैं। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने उदयपुर में भूमाफिया और राजनीतिक गठजोड़ की पोल खोलकर रख दी है।

Pratahkal Bureau

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