उदयपुर। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी देने में भी अब नगर निगम द्वारा अलग-अलग बहाने बनाए जा रहे हैं। निगम के अधिकारी डिविडिंग मशीन के खर्चे की जानकारी सूचना के अधिकार में देना लोकहित में नहीं मान रहे हैं और जानकारी देने से इनकार कर रहे हैं। ऐसा ही एक गंभीर मामला अब सामने आया है।

तीन माह तक लटकाया मामला, फिर गोपनीयता का दिया हवाला

जानकारी के अनुसार नगर निगम की गैराज शाखा द्वारा गत वर्ष खरीदी गई नई डिविडिंग मशीन के वर्ष 2025 में जनवरी से लेकर दिसंबर तक इस डिविडिंग मशीन के संचालन और रखरखाव को लेकर हुए खर्चे की जानकारी मांगी थी। झील विकास प्राधिकरण के पूर्व सदस्य तेजशंकर पालीवाल ने सूचना के अधिकार के तहत 5 जनवरी 2026 को यह जानकारी मांगी थी। तीन माह तक तो निगम आरटीआई में मांगी इस जानकारी को लटकाता रहा और बाद में निगम ने दिए जवाब में स्पष्ट रूप से लिखा कि "यह जानकारी सृजनात्मक एवं व्यापक लोक हित में नहीं होने से देय नहीं है।" पालीवाल को एक ही तरह की भाषा में दो पत्र भेजकर इस बारे में बताया गया है।

तकनीक और गोपनीयता पर उठे सवाल

बड़ी बात यह है कि पहले जब पुरानी डिविडिंग मशीन की जानकारी मांगी गई थी, तो निगम ने उसे उपलब्ध करवा दी थी और अब निगम इसे देने से साफ इनकार कर रहा है। इस नई डिविडिंग मशीन में ऐसी कौन सी तकनीक लगी है, जिसकी जानकारी सार्वजनिक होने से गोपनीयता भंग हो जाएगी, जो लोक हित में नहीं है? यह सवाल अब चर्चा का विषय बना हुआ है।

पुरानी मशीन के रखरखाव पर होते थे प्रतिदिन 13 हजार रुपए

पूर्व में चल रही डिविडिंग मशीन के रखरखाव और खर्चे को लेकर मांगी गई जानकारी में यह तथ्य सामने आया था कि पुरानी डिविडिंग मशीन पर प्रतिदिन 13 हजार रुपए से अधिक का खर्चा हो रहा था। इस तरह से साल भर में लाखों रुपए का खर्चा डिविडिंग मशीन पर किया जा रहा था, जबकि सफाई नाममात्र की हो रही थी।

Pratahkal Bureau

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