उदयपुर: जनजातीय किसानों के पलायन को रोकने और समृद्धि की राह प्रशस्त करने हेतु सांसद डॉ. मन्नालाल रावत का बड़ा कदम
उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत की अध्यक्षता में आयोजित अहम बैठक में देवास-झाड़ोल क्षेत्र के जनजातीय किसानों के पलायन को रोकने और उनकी आय बढ़ाने पर विस्तृत रणनीति बनी। कृषि और उद्यान विभाग की संयुक्त बैठक में मृदा परीक्षण, जैविक खेती प्रशिक्षण केंद्र का प्रस्ताव और किसानों के जीवन स्तर में सुधार हेतु कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जिससे क्षेत्र में कृषि विकास की नई उम्मीद जागी है।

उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर में जनजातीय अंचल के किसानों की तकदीर बदलने और खेती को लाभ का सौदा बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) कार्यालय में उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में कृषि और उद्यान विभाग के बीच तालमेल बैठाकर खेती के भविष्य पर मंथन किया गया। इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु देवास-झाड़ोल जैसे सुदूर जनजातीय क्षेत्रों से किसानों के हो रहे पलायन को रोकना और उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना रहा।
बैठक के दौरान सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने न केवल प्रशासनिक चर्चा की, बल्कि धरातल पर चल रहे कार्यों का भी सूक्ष्मता से निरीक्षण किया। उन्होंने मृदा परीक्षण प्रयोगशाला का गहराई से अवलोकन किया और यह समझा कि किस प्रकार मिट्टी के नमूनों का संग्रहण और उनकी वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है। सांसद ने एग्री क्लीनिक कार्यालय का भी दौरा किया और वहां दी जा रही सेवाओं की प्रभावशीलता को जांचा। उनका स्पष्ट संदेश था कि यदि किसान को खेत की मिट्टी की सेहत और सही खाद-बीज का ज्ञान समय पर मिल जाए, तो उसे रोजगार की तलाश में अपना घर और गांव नहीं छोड़ना पड़ेगा।
इस रणनीतिक संवाद में कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक सुधीर कुमार वर्मा सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण और किसान संघ के प्रतिनिधि नारायण सिंह चन्दाना भी उपस्थित रहे। चर्चा के दौरान यह तथ्य उभरकर आया कि जनजातीय किसानों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए उन्हें पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर जैविक और प्राकृतिक खेती की ओर मोड़ना अनिवार्य है। इसी को ध्यान में रखते हुए बैठक में जनजातीय क्षेत्र में किसानों के विशेष प्रशिक्षण हेतु प्राकृतिक एवं जैविक खेती के क्षेत्रीय केंद्र खोलने का एक दूरगामी प्रस्ताव रखा गया।
यह बैठक केवल कागजी कार्यवाही तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे किसानों को सीधे उद्यानिकी और कृषि विभाग की कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ें। कार्यक्रम का समापन एक सकारात्मक संकल्प के साथ हुआ, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि देवास-झाड़ोल क्षेत्र के किसानों की आय में वृद्धि करना और उन्हें खेती के माध्यम से सम्मानजनक जीवन प्रदान करना सरकार और प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यह पहल आने वाले समय में वागड़ और मेवाड़ के जनजातीय क्षेत्रों में कृषि क्रांति का आधार बन सकती है।

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