उदयपुर मार्बल मंडी संकट: उद्यमियों ने की 100 एकड़ भूमि और क्लस्टर की मांग
औद्योगिक भूमि की कमी से एशिया की सबसे बड़ी मार्बल मंडी से पलायन रोकने के लिए उद्यमियों ने जिला कलक्टर को 100 एकड़ भूमि और नए स्टोन क्लस्टर का प्रस्ताव सौंपा।

उदयपुर। एशिया की सबसे बड़ी मार्बल निर्यात मंडी के रूप में विख्यात उदयपुर मार्बल मंडी के अस्तित्व पर वर्तमान में संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इस वैश्विक पहचान वाले औद्योगिक क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं के समाधान एवं मंडी के समग्र विकास को लेकर शुक्रवार को मार्बल भवन स्थित मूमल कॉन्फ्रेंस हॉल में मार्बल प्रोसेसर्स समिति एवं जिला कलक्टर के बीच एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में जिला कलक्टर गौरव अग्रवाल ने समिति सदस्यों से विस्तृत चर्चा करते हुए उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना तथा इस दिशा में आवश्यक सकारात्मक कार्यवाही तत्काल आरम्भ करने हेतु आश्वस्त किया।
समिति महासचिव ऋषि कटारिया के अनुसार, शुक्रवार को आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक में बड़ी संख्या में मार्बल व्यवसायियों एवं उद्योग प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बैठक के दौरान समिति अध्यक्ष डॉ. हितेष पटेल सहित अन्य पदाधिकारियों ने मार्बल उद्योग से जुड़ी ज्वलंत समस्याओं को बिंदुवार प्रस्तुत करते हुए उनके त्वरित समाधान की पुरजोर मांग की। इस विमर्श में सबसे प्रमुख मुद्दा औद्योगिक भूमि की तीव्र कमी का उभरकर सामने आया। समिति अध्यक्ष डॉ. हितेष पटेल ने इस गंभीर स्थिति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उदयपुर की मार्बल मंडी एशिया की सबसे बड़ी निर्यात मंडी होने का गौरव रखती है, किंतु आसपास के क्षेत्रों में निरंतर बढ़ते आवासीय दबाव के कारण उद्योगों के विस्तार के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इसी अभाव के चलते कई उद्यमी विवश होकर अपना उद्योग यहाँ से अन्यत्र स्थानांतरित कर रहे हैं, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंताजनक है। उद्यमियों ने प्रशासन से लगभग 100 एकड़ भूमि की मांग करते हुए एक नवीन 'स्टोन क्लस्टर' का निर्माण करने का प्रस्ताव रखा है।
बैठक में पूर्व अध्यक्ष शरत कटारिया ने भुवाणा-चित्रकूट क्षेत्र में यूआईटी द्वारा अधिग्रहित भूमि से संबंधित दीर्घकालिक समस्या को प्रमुखता से उठाया। कटारिया ने अवगत कराया कि वर्षों से लंबित इस प्रकरण के कारण कई उद्योग प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रहे हैं। इस पर जिला कलक्टर ने संबंधित अधिकारियों से तत्काल प्रकरण की विधिक जानकारी प्राप्त कर उचित समाधान निकालने का भरोसा दिलाया। वहीं, समिति के पूर्व अध्यक्ष विजय गोधा ने लघु उद्योगों के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्रक्रिया में आ रही प्रशासनिक बाधाओं से अवगत कराया। उन्होंने विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा नियमों के पालन में व्याप्त असंगति की ओर कलक्टर का ध्यान आकर्षित किया, जिस पर जिला कलक्टर ने 'एकल विंडो सिस्टम' को प्रभावी रूप से लागू करने तथा सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने के सख्त निर्देश दिए ताकि उद्योग संचालन में अनावश्यक विलंब को समाप्त किया जा सके।
उद्योगों में उत्पाद परिवर्तन की जटिल वैधानिक प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग पूर्व अध्यक्ष राजेश खमेसरा द्वारा रखी गई, जिस पर जिला कलक्टर ने राज्य सरकार को आधिकारिक प्रस्ताव भेजने की बात कही। साथ ही, उन्होंने भूमि रूपांतरण शुल्क की समीक्षा कर राहत प्रदान करने का भी आश्वासन दिया। इसके अतिरिक्त, मंडी क्षेत्र में भारी वाहनों की अव्यवस्थित पार्किंग से उत्पन्न यातायात बाधाओं पर भी गहन चर्चा हुई, जिसमें उद्यमियों ने व्यवस्थित पार्किंग स्थल विकसित करने की अपील की। जिला कलक्टर गौरव अग्रवाल ने अंत में स्पष्ट किया कि मार्बल उद्योग उदयपुर की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है और प्रशासन इसके संरक्षण हेतु पूर्णतः प्रतिबद्ध है। उन्होंने राज्य सरकार के निर्देशों के अनुरूप प्राथमिकता के आधार पर समस्याओं के निस्तारण का संकल्प दोहराया, जिससे क्षेत्र के औद्योगिक विकास को पुनः एक नई और सकारात्मक दिशा मिलने की उम्मीद जागी है।

