उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर के औद्योगिक परिदृश्य में एक नए स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत हुई है। बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान 2024 के तहत भारत सरकार के दूरदर्शी निर्देशों का पालन करते हुए राजस्थान सरकार ने स्थानीय उद्यमिता को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए 'एक जिला-एक उत्पाद' (ODOP) के ऑनलाइन पंजीकरण की खिड़की खोल दी है। उदयपुर जिले के गौरव और यहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले 'मार्बल एवं ग्रेनाइट उत्पाद' को इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत शामिल किया गया है, जिससे क्षेत्र के पत्थर उद्योग में उत्साह की एक नई लहर दौड़ गई है। अब स्थानीय विनिर्माता राजस्थान सिंगल साइन ऑन (SSO) पोर्टल के माध्यम से अपनी इकाइयों का पंजीकरण कराकर सरकार द्वारा दी जा रही विशेष रियायतों और प्रोत्साहनों का सीधा लाभ उठा सकेंगे।

इस महत्वपूर्ण विकासक्रम की आधिकारिक जानकारी साझा करते हुए जिला उद्योग एवं वाणिज्य केंद्र के महाप्रबंधक शैलेन्द्र शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार औद्योगिक निवेश को गति देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजीकरण की प्रक्रिया को अत्यंत पारदर्शी और सुगम बनाया गया है। इच्छुक आवेदकों को ऑनलाइन पोर्टल पर अपना पासपोर्ट साइज फोटो, जाति प्रमाण पत्र, इकाई का पैन कार्ड, उत्पादन की तिथि, प्रथम एवं वर्तमान विक्रय बिल, उद्यम रजिस्ट्रेशन और उत्पाद के छायाचित्र जैसे अनिवार्य दस्तावेज अपलोड करने होंगे। शैलेन्द्र शर्मा ने जोर देकर कहा कि यह पहल न केवल पुराने स्थापित उद्योगों को मजबूती देगी, बल्कि नए उद्यमियों के लिए भी सफलता के द्वार खोलेगी।

राजस्थान एक जिला एक उत्पाद नीति-2024 के तहत मिलने वाले वित्तीय परिलाभों का खाका भी अत्यंत आकर्षक है। योजना के अनुसार, सूक्ष्म उद्यमों को परियोजना लागत का 25 प्रतिशत या अधिकतम 15 लाख रुपए तक का अनुदान दिया जाएगा, जबकि लघु उद्यमों के लिए यह सीमा लागत का 15 प्रतिशत या अधिकतम 20 लाख रुपए निर्धारित की गई है। सामाजिक समावेश को प्राथमिकता देते हुए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिला, दिव्यांग और युवा उद्यमियों के लिए 5 लाख रुपए के अतिरिक्त अनुदान का विशेष प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा, तकनीकी विकास और आधुनिकता को बढ़ावा देने के लिए सॉफ्टवेयर अर्जन हेतु 50 प्रतिशत या अधिकतम 5 लाख रुपए और गुणवत्ता मानकों के प्रमाणन हेतु 3 लाख रुपए तक की सहायता राशि प्रदान की जाएगी।

व्यापारिक विस्तार और वैश्विक बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए भी नीति में व्यापक प्रावधान किए गए हैं। मेलों और प्रदर्शनियों में बाजार सहायता के तहत स्टॉल रेंट का 75 प्रतिशत या अधिकतम 2 लाख रुपए तक का पुनर्भरण किया जाएगा। डिजिटल युग की आवश्यकताओं को देखते हुए ई-कॉमर्स प्रोन्नति के लिए भी सरकार ने खजाना खोल दिया है, जिसमें डिजिटाइजेशन हेतु अधिकतम 1 लाख रुपए और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर लिस्टिंग हेतु एकबारीय 60 हजार रुपए की वित्तीय सहायता शामिल है। उदयपुर के मार्बल और ग्रेनाइट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में यह कदम एक मील का पत्थर साबित होगा, जो न केवल निवेश को आकर्षित करेगा बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अपार अवसरों का सृजन भी करेगा।

Pratahkal Bureau

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