उदयपुर जिले के घासा थाना क्षेत्र में दो युवकों ने एक वृद्धा और उसके सहयोगी के खिलाफ, उसके पति द्वारा वर्ष 1960 में बेची गई जमीन को पति की मौत के बाद दस्तावेजों और अपनी पुत्रियों की जानकारी छिपाकर अन्य को बेचकर रजिस्ट्री करवाने का मामला दर्ज करवाया है।

जमीन की खरीद-फरोख्त का पुराना इतिहास

पुलिस के अनुसार अमरा गायरी पुत्र स्व. दला गायरी निवासी बिठोली घासा और मांगीलाल गायरी पुत्र कूका उर्फ देवाजी गायरी निवासी बिठोली घासा ने मोहन पुत्र परथा गायरी निवासी विठोली घासा, केसी पत्नी स्व. भोलाजी गायरी निवासी विठोली घासा के खिलाफ मामला दर्ज करवाया कि उनकी विठोली में जमीन है। यह जमीन को वर्ष 1960 में स्व. भोला गायरी पुत्र कन्ना जी गाडरी से अमरा व मांगीलाल के पिता कूकाजी उर्फ देवाजी ने खरीदी थी।

खेती के दौरान हुआ विवाद और खुलासा

गत 10-15 दिन पूर्व जब वह अपनी जमीन खेती कर रहे थे तो आरोपी आए और उसे धमकाया कि यह जमीन उनकी है और उसको वहां से बाहर जाने के लिए कहा। जिस पर उसने राजस्व कार्यालय में जाकर पता किया तो सामने आया कि "मोहन गायरी ने भोला गायरी की मृत्यु का फायदा उठाकर उसकी पत्नी केसी गायरी के साथ मिलकर इस जमीन की रजिस्ट्री अपने पक्ष में करवा लिया और जमीन का नामान्तरण भी अपने पक्ष खुलवा लिया है।"

जानकारी छुपाकर धोखाधड़ी से करवाई रजिस्ट्री

केसी गायरी ने उसकी 4 पुत्रियां होने के बावजूद भी राजस्व रिकार्ड में यह जानकारी छुपाते हुए अपने आप को ही वारिस बताकर अपने नाम से नामांतरण खुलवाकर बिना किसी को जानकारी दिए मोहन गायरी को इस जमीन को बेच दिया। इस जमीन सौदे में पेमाराम पुत्र हवा तथा भजा पुत्र नारू गाडरी ने भी आरोपी मिलीभगत कर डांगी होते हुए भी अपने आप को गायरी बताते हुए रजिस्ट्री में गवाह के तौर पर हस्ताक्षर किए है। पुलिस ने अब इस पूरे प्रकरण में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

Pratahkal Bureau

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