उदयपुर। जिले के खैरोदा थाना क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ एक व्यक्ति ने अपने ही पिता, माता और भाई पर दादा के नाम से फर्जी वसीयत तैयार कर पैतृक संपत्ति हड़पने का आरोप लगाया है। यह सनसनीखेज मामला पारिवारिक रिश्तों में आई कड़वाहट और जमीन के लालच की उस हद को दर्शाता है, जहाँ संपत्ति हथियाने के लिए दस्तावेजों में जालसाजी का सहारा लिया गया।

मोडी (खैरोदा) निवासी नरेश पुत्र रामलाल जाट ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि मोडी गांव में स्थित उनके दादा उदा जाट की पुश्तैनी जमीन है। उदा जाट के निधन के पश्चात यह भूमि उनके पुत्र हीरा जाट के नाम पर दर्ज हुई थी। हीरा जाट के वारिसों में दो पुत्र रामलाल और चुन्नीलाल, तथा चार पुत्रियां चम्पाबाई, धापुबाई, लक्ष्मीबाई और फेफीबाई शामिल थीं। इनमें से फेफीबाई का निधन हो चुका है, जिनके पुत्र का नाम सुरेश है।

शिकायतकर्ता नरेश ने आरोप लगाया कि उसके भाई दिनेश ने पिता रामलाल और मां भगवती उर्फ भगवानी के साथ मिलीभगत कर एक सोची-समझी साजिश रची। आरोपियों ने अपने दादा हीरा जाट के नाम से स्टाम्प खरीदकर एक फर्जी वसीयत तैयार की। इस पूरी प्रक्रिया में भगवती उर्फ भगवानी ने स्वयं गवाह बनकर उक्त बेशकीमती जमीन दिनेश के नाम स्थानांतरित करवा दी। नरेश का स्पष्ट कहना है कि उनके दादा हीरा जाट ने अपने जीवनकाल में कभी कोई वसीयत नहीं की थी।

हीरा जाट की मृत्यु के बाद, आरोपियों ने जमीन हड़पने के कुत्सित इरादे से फर्जी वसीयत का सहारा लिया। इसी दस्तावेज को आधार बनाकर उन्होंने उपजिला कलक्टर न्यायालय, वल्लभनगर में वाद प्रस्तुत किया और उसके माध्यम से जमीन को अपने नाम दर्ज करवा लिया। इस अवैध हस्तांतरण की जानकारी मिलने पर नरेश ने संबंधित अधिकारी के समक्ष अपील दायर की है, जिस पर फिलहाल स्टे (स्थगन आदेश) प्रभावी है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि स्टे होने के बावजूद आरोपी अब उसे जबरन जमीन से बेदखल करने का प्रयास कर रहे हैं। पुलिस ने नरेश की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर लिया है और अब पूरे प्रकरण की गहनता से जांच की जा रही है। यह घटना न केवल धोखाधड़ी का एक मामला है, बल्कि परिवार के भीतर संपत्ति के विवाद के बढ़ते भयावह स्वरूप को भी उजागर करती है।

Pratahkal HQ

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