जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास पर उदयपुर में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न
जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ में आयोजित संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण के लिए नई रणनीतियों पर मंथन किया।

उदयपुर। जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ में 'जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास में इसकी भूमिका' विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का गरिमामय समापन हुआ। इस वैश्विक संगोष्ठी में देश-विदेश के प्रबुद्ध विद्वानों, शोधकर्ताओं एवं पर्यावरण विशेषज्ञों ने एक मंच पर एकत्रित होकर जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता ह्रास और सतत विकास की रणनीतियों पर गहन मंथन किया। सम्मेलन के मुख्य अतिथि विद्यापीठ के कुलाधिपति बी.एल. गुर्जर रहे, जबकि अध्यक्षता कुलपति मानद कर्नल प्रो. शिव सिंह सारंगदेवोत ने की।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. सारंगदेवोत ने इस बात पर जोर दिया कि आर्थिक प्रगति तभी सार्थक सिद्ध होती है जब वह प्रकृति और पर्यावरण के संतुलन को सुरक्षित रखे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सतत विकास का मूल आधार प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करना है और भावी पीढ़ियों के अस्तित्व के लिए पर्यावरण संरक्षण वर्तमान समय की अनिवार्य आवश्यकता है। मंच पर प्रोफेसर मंजू मांडोत भी उपस्थित रहीं। सम्मेलन के तकनीकी सत्र में विशिष्ट अतिथि प्रो. विमल शर्मा ने जैव विविधता के निरंतर हो रहे ह्रास के कारण वैश्विक खाद्य सुरक्षा एवं कृषि व्यवस्था पर उत्पन्न हो रहे गंभीर संकटों को वैज्ञानिक तथ्यों के माध्यम से उजागर किया।
मुख्य वक्ता प्रोफेसर संगीता राठौड़ ने जलवायु परिवर्तन के वर्तमान दौर में स्थानीय जैव विविधता संरक्षण के व्यावहारिक उपायों एवं वैश्विक पर्यावरण नीतियों पर विस्तृत प्रकाश डाला। संस्थान की निदेशक डॉ. सपना श्रीमाली ने अतिथियों का स्वागत करते हुए सम्मेलन के उद्देश्यों को रेखांकित किया। आयोजन सचिव डॉ. पूजा जोशी ने दो दिवसीय कार्यक्रम के विभिन्न तकनीकी सत्रों का सफल संचालन एवं समन्वय किया तथा कार्यक्रम के अंत में अतिथियों का आभार व्यक्त किया। सम्मेलन में डॉ. पल्लवी सक्सेना (रूस), डॉ. प्रीतम जोशी, डॉ. मनोज जोशी एवं डॉ. विजय सहित अनेक विषय विशेषज्ञों ने अपने शोधपरक विचार प्रस्तुत किए। यह सम्मेलन पर्यावरण संरक्षण की दिशा में वैश्विक चिंताओं और समाधानों के समन्वय के लिए एक मील का पत्थर सिद्ध हुआ।

