उदयपुर: बुजुर्गों के अनुभवों की छांव में 'वृक्षम अमृतम' का आत्मीय संवाद, स्नेह और सम्मान से भीगा तारा संस्थान
उदयपुर के श्रीमती कृष्णा शर्मा वृद्धाश्रम में 'वृक्षम अमृतम सेवा संस्थान' द्वारा आयोजित वृद्धजन संवाद कार्यक्रम ने मानवता की मिसाल पेश की। तारा संस्थान की संस्थापक कल्पना गोयल व टीम द्वारा भव्य स्वागत के बीच गोपेश शर्मा और अन्य सदस्यों ने बुजुर्गों को समाज की असली संपत्ति बताया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। पढ़िए सेवा और सम्मान की यह पूरी रिपोर्ट।

उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर के सेक्टर 14 स्थित श्रीमती कृष्णा शर्मा वृद्धाश्रम में आज उस समय एक भावुक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जब 'वृक्षम अमृतम सेवा संस्थान' के सदस्य बुजुर्गों के बीच खुशियां बांटने पहुंचे। यह केवल एक औपचारिक दौरा नहीं था, बल्कि नई और पुरानी पीढ़ी के बीच संस्कारों और सरोकारों का एक ऐसा सेतु था, जिसने वहां मौजूद हर शख्स की आंखों में चमक और चेहरे पर मुस्कान बिखेर दी। तारा संस्थान द्वारा संचालित इस आश्रम में आयोजित सम्मान समारोह ने समाज को यह कड़ा संदेश दिया कि बुजुर्ग हमारी विरासत हैं, बोझ नहीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ बेहद गरिमामय ढंग से हुआ। तारा संस्थान की संस्थापक कल्पना गोयल, सचिव दीपेश मित्तल और प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर आरती चित्तौड़ा ने अतिथि सत्कार की परंपरा को निभाते हुए वृक्षम अमृतम के सदस्यों का ऊपरना ओढ़ाकर और मेवाड़ी पगड़ी पहनाकर भव्य स्वागत किया। इस आत्मीय स्वागत ने कार्यक्रम में एक नई ऊर्जा का संचार कर दिया। इस अवसर पर वृक्षम अमृतम संस्थान की ओर से अध्यक्ष गोपेश शर्मा, उपाध्यक्ष अनिल पारिक, सचिव यशवन्त त्रिवेदी और सहसचिव नीलेश पालीवाल ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। साथ ही कार्यकारिणी सदस्य महेश उपाध्याय, अनिल कुशवाहा, ओम प्रकाश शर्मा, कृष्णा उपाध्याय, शालिनी उपाध्याय, पूनम कुशवाहा, सतीश अग्रवाल और हेमराज पोद्दार सहित संस्था के अन्य सम्मानित सदस्यों ने वृद्धजनों के साथ समय बिताकर उनका कुशलक्षेम जाना।
समारोह के दौरान चर्चा का केंद्र केवल मानवीय संवेदनाएं ही नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व भी रहे। तारा संस्थान के मैनेजर राजकुमार मेघालय ने संस्थान द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बेहद मार्मिक शब्दों में कहा कि वृद्धजन समाज के लिए बोझ नहीं हैं, बल्कि वे हमारी वह अनमोल संपत्ति हैं जिनके अनुभवों से हम अपना भविष्य संवार सकते हैं। वहीं, वृक्षम अमृतम के अध्यक्ष गोपेश शर्मा ने जीवन में पर्यावरण की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने पेड़ों और ऑक्सीजन के महत्व को समझाते हुए प्रकृति और मनुष्य के अटूट संबंध को रेखांकित किया। प्रतीक स्वरूप संस्थान को एक आम का पौधा भी भेंट किया गया, जो विकास और निरंतरता का संदेश देता है। कार्यक्रम का समापन वृद्धाश्रम परिसर के अवलोकन और सुखद स्मृतियों के साथ हुआ, जो यह याद दिला गया कि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।

Pratahkal Bureau
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